वीर शिरोमणी अमर सपूत, महाराणा प्रताप कहलाता था।
जिस शूरवीर का सुनकर नाम तुर्की अक़बर भी घबराता था।।
उस मेवाड़ी सूरज ने दिलों में ऐसा किया उजियारा है।
जो माँ के वीर सपूतों को सदा रहेगा प्यारा है।।
वो रुका नहीं वो झुका नहीं, था मातृभूमि का परवाना।
महलों से नाता तोड़ दिया, था मातृभूमि का दीवाना।।
आया जीवनभर कितना कष्ट, पर बना इतिहास का अमर पृष्ठ।
वो हल्दी घाटी का था विलक्षण जुझार, था स्वामिभक्त नीले घोड़े का सवार।
वो शूरवीर था, शौर्य भरा जैसे अंगार।।
वीर शिरोमणी अमर सपूत, महाराणा प्रताप कहलाता था।
जिस शूरवीर का सुनकर नाम तुर्की अक़बर भी घबराता था।।
हर दिल पर था उसका शासन।
है देशभक्तों का दिल ही आसन।।
था वो देदीप्यमान शौर्य पुंज।
है युगों युगों का प्रेरणा पुंज।।
वीर शिरोमणी अमर सपूत, महाराणा प्रताप कहलाता था।
जिस शूरवीर का सुनकर नाम तुर्की अक़बर भी घबराता था।।
क्या कुछ प्रताप ने सहा नहीं, पर दुश्मन से समझौता किया नहीं, प्रलोभन कोई डिगा ना पाया, जो सोच लिया वो कर दिखलाया।।
वीर शिरोमणी अमर सपूत, महाराणा प्रताप कहलाता था।
जिस शूरवीर का सुनकर नाम तुर्की अक़बर भी घबराता था।।