शाहजहांपुर: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोटपूतली-बहरोड़ के सानिध्य में बुधवार, 3 जून को ग्राम पंचायत भवन गुगलकोटा में बाल विवाह उन्मूलन विषय पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पैरालीगल वालंटियर (पीएलवी) सुनील कुमार ने ग्रामीण महिलाओं को बाल विवाह के दुष्परिणामों एवं इससे संबंधित कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि बाल विवाह आज भी समाज की एक गंभीर सामाजिक समस्या है, जो बच्चों विशेषकर बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है। कम उम्र में विवाह होने से बच्चों की शिक्षा बाधित हो जाती है तथा उनके आत्मनिर्भर और सशक्त बनने के अवसर सीमित हो जाते हैं। बालिकाओं को घरेलू हिंसा, मानसिक एवं शारीरिक शोषण तथा सामाजिक भेदभाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जागरूकता शिविर में प्रारंभिक गर्भावस्था के दुष्परिणामों पर भी प्रकाश डाला गया। बताया गया कि कम आयु में गर्भधारण मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इससे मातृ मृत्यु दर, कुपोषण, प्रसव संबंधी जटिलताओं तथा नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य जोखिमों में वृद्धि होती है।
इस अवसर पर “नालसा आशा (Awareness, Support, Help & Action) – SOP for Eliminating Child Marriage” योजना की जानकारी देते हुए बताया गया कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा बाल विवाह उन्मूलन के लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। योजना का उद्देश्य बाल विवाह की रोकथाम, प्रभावित बच्चों को सहायता, कानूनी संरक्षण तथा समाज में जागरूकता बढ़ाना है।
महिलाओं को यह भी बताया गया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह कराना, उसमें सहयोग करना अथवा उसे प्रोत्साहित करना दंडनीय अपराध है। साथ ही बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित ग्रामीणों से बाल विवाह जैसी कुप्रथा के उन्मूलन में सक्रिय सहयोग देने तथा बच्चों को शिक्षा एवं समान अवसर उपलब्ध कराने का संकल्प लेने का आह्वान किया गया, ताकि एक जागरूक, सशक्त और विकसित समाज का निर्माण किया जा सके। इस अवसर पर ग्राम पंचायत प्रशासक (सरपंच) श्याम सुंदर यादव, ग्राम विकास अधिकारी नितिन चौधरी, कनिष्ठ सहायक किरण शर्मा, रामकिशन, कमला, माया, किरण, ममता, रचना, रेखा, गिनडो, रामबाई, चमेली, माया सहित काफी संख्या में ग्रामीण महिलाएं उपस्थित रही।