प्रस्तावित बस स्टैंड के नाम पर भू-माफिया कूट रहे चांदी, लोगों को गुमराह कर प्लॉट बेचने का खेल तेज

AYUSH ANTIMA
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निवाई (लालचंद माली): क्षेत्र में प्रस्तावित बस स्टैंड को लेकर फैली असमंजस की स्थिति का फायदा उठाकर भू-माफियाओं द्वारा लोगों को गुमराह कर महंगे दामों में प्लॉट बेचने का खेल जोरों पर चल रहा है। क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि प्रस्तावित बस स्टैंड के नाम पर कॉलोनियों की जमीनों को आकर्षक बताकर खरीदारों को भ्रमित किया जा रहा है, जबकि बस स्टैंड को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। जानकारी के अनुसार हाल ही में नगर पालिका द्वारा पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित अपना जर्जर भवन ध्वस्त किया गया है। इसके बाद उस भूमि को भी बस स्टैंड क्षेत्र में शामिल किए जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसके साथ ही सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की जमीन को भी प्रस्ताव में शामिल किए जाने की बात सामने आ रही है। इससे यह माना जा रहा है कि नया बस स्टैंड लगभग पुरानी जगह पर ही विकसित किया जा सकता है। शहरवासियों की भी लंबे समय से यही मांग रही है कि महिलाओं की सुरक्षा और शहर की सुविधा को देखते हुए बस स्टैंड अपनी पुरानी जगह पर ही बनाया जाए। उधर रिकॉर्ड में अलग-अलग स्थानों पर बस स्टैंड के नाम दर्ज जमीन ने लोगों की उलझन और बढ़ा दी है। पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग पर खसरा संख्या 5661/2971 में करीब 55 बिस्वा जमीन बस स्टैंड के नाम दर्ज की गई थी, जबकि वर्तमान में खसरा संख्या 5834/4467 दशहरा मैदान क्षेत्र में भी बस स्टैंड के नाम भूमि दर्ज बताई जा रही है। ऐसे में लोगों के बीच सवाल उठ रहा है कि आखिर वास्तविक बस स्टैंड बनेगा कहां। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि भू-माफिया प्लॉट बेचने के लिए राजस्व तंत्र से मिली भगत कर भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि पहले भी बाईपास पुलिया के नीचे प्रस्तावित बस स्टैंड का बोर्ड लगाया गया था, लेकिन वहां आज तक बस स्टैंड का निर्माण नहीं हो सका। इसी तरह ट्रॉमा अस्पताल के प्रस्तावित स्थानों को लेकर भी लगातार बदलाव की चर्चाएं होती रही हैं। पहले अस्पताल सोयला क्षेत्र में प्रस्तावित बताया गया, उसके बाद पूर्व विधायक प्रशांत बैरवा के फार्म हाउस के सामने इसकी चर्चाएं चलीं और अब राजकीय महाविद्यालय के सामने उप जिला अस्पताल के नाम भूमि दर्ज होने की जानकारी सामने आ रही है। लोगों का कहना है कि सरकारी परियोजनाओं के स्थानों में बार-बार बदलाव से आमजन का विश्वास कमजोर हो रहा है। उनका कहना है कि किसी भी परियोजना का वास्तविक स्थान वही माना जाएगा, जब उसका कार्य धरातल पर शुरू होगा, अन्यथा प्रस्ताव और चर्चाओं के नाम पर लोगों को भ्रमित किया जाता रहेगा।

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