प्रभारी नियुक्त, पत्र जारी फिर भी गंदगी से कराह रहा शहर

AYUSH ANTIMA
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झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर में सफाई व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए नई नियुक्तियां और बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से मेल खाती नजर नहीं आ रही। एक ओर स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) राजस्थान सरकार के ब्रांड एम्बेसडर एवं स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) राजस्थान सरकार के समन्वयक के.के. गुप्ता ने झुंझुनूं में स्वच्छता शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त कर व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त बनाने की पहल की है, वहीं दूसरी ओर शहर के वार्ड नंबर 60 में दो महीने से जाम नालियां, सड़कों पर फैला गंदा पानी और गंदगी से त्रस्त नागरिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब स्वच्छता निगरानी के लिए अलग से जिम्मेदारियां तय की जा रही हैं, व्हाट्सएप ग्रुप बनाए जा रहे हैं और शिकायतों के त्वरित समाधान की बात कही जा रही है, तब शहर के कुछ हिस्सों में हालात इतने बदतर क्यों हैं कि महिलाओं, बच्चों और युवाओं को खुद फावड़ा और झाड़ू उठाकर सफाई करनी पड़ रही है। 

*दावों और धरातल के बीच बढ़ता फासला* 

 के.के. गुप्ता द्वारा नगर परिषद आयुक्त को भेजे गए पत्र में कमलकांत शर्मा को प्रभारी तथा ताराचंद सैनी को सह-प्रभारी नियुक्त कर शहर में स्वच्छता जागरूकता बढ़ाने और शिकायतों के त्वरित निस्तारण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दावा यह भी किया गया कि कहीं भी गंदगी दिखाई देने पर फोटो साझा होते ही समाधान की प्रक्रिया तेज होगी लेकिन इसी दौरान वार्ड 60 के कुम्हारों के मोहल्ले से सामने आई तस्वीरें और स्थानीय लोगों के आरोप व्यवस्था की कार्य प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। यहां लोगों का कहना है कि महीनों से नालियों की सफाई नहीं हुई, शिकायतें होती रहीं लेकिन समाधान नहीं हुआ।

*जब जनता को खुद करनी पड़े सफाई* 

वार्डवासियों के अनुसार हालात इतने खराब हो गए कि महिलाओं, युवाओं और बच्चों ने खुद सफाई अभियान चलाकर नालियों और गलियों की सफाई की। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद की सफाई व्यवस्था लंबे समय से सुस्त बनी हुई है। पूर्व वार्ड पार्षद कृष्ण कुमार महला ने भी दावा किया कि उन्होंने कई बार अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उनका कहना है कि जनता का आक्रोश उन्हें झेलना पड़ रहा है और उन्हें अपने घर के आगे का कचरा स्वयं साफ करना पड़ रहा है।

*स्वच्छता मॉडल या शिकायतों का ढेर*

स्वच्छ भारत मिशन की नई व्यवस्था का उद्देश्य शिकायतों का त्वरित समाधान और जनभागीदारी बढ़ाना बताया गया है लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यदि शिकायतों के निस्तारण के लिए पूरी व्यवस्था सक्रिय है तो फिर शहर के कुछ वार्डों में गंदगी, जाम नालियां और कचरा संग्रहण की शिकायतें लगातार क्यों सामने आ रही हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि व्यवस्था तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब उसका असर कागजों और बैठकों से निकलकर गलियों और मोहल्लों में दिखाई दे।
वार्ड 60 के नागरिकों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो नगर परिषद कार्यालय का घेराव कर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। लोगों का कहना है कि उन्हें घोषणाओं और आश्वासनों से ज्यादा जमीन पर काम चाहिए। जब स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर प्रभारी, सह-प्रभारी, मॉनिटरिंग और त्वरित समाधान की व्यवस्था मौजूद है, तब दो महीने से गंदगी में डूबे वार्ड आखिर किसकी जवाबदेही तय कर रहे हैं।

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