मेरी धार्मिक यात्रा प्रथम पड़ाव प्रयागराज

AYUSH ANTIMA
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सनातन धर्म में प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम, जहां गंगा जो पवित्रता और नकारात्मक का नाश करने वाली, यमुना भक्ति और प्रेम का प्रवाह करने वाली और सरस्वती आध्यात्मिक ज्ञान और विवेक देने वाली तीनो नदियों का मिलन होता है। यह स्थान स्नानों के स्थान में सर्वोच्च स्थान माना गया है। ब्रह्मवैवर्त पुराण और अग्नि पुराण जैसे शास्त्रों में संगम स्नान को सभी पापो का नाश करने वाला व धनात्मक ऊर्जा का संचार करने वाला बताया गया है। अध्यात्मिक महत्व के साथ साथ संगम जल को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अत्यन्त शुद्ध और उर्जावान माना गया है। शोधकर्ताओं ने माना है कि गंगा में जल बैक्ट्रियोओफेज नामक जीवाणु होते हैं, जो जल को स्वाभाविक रूप से शुद्ध करते हैं और प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। धार्मिक यात्रा के पहले पड़ाव में संगम में स्नान करने का परम सौभाग्य मिला। स्नान करने के बाद लेटे वाले हनुमान जी के दर्शन किए, जो संगम के निकट ही है। पौराणिक मान्यता है कि संगम स्नान के बाद यदि लेटे वाले हनुमान जी के दर्शन नहीं किए तो स्नान का पुण्य अधूरा ही रहता है। पौराणिक कथाओ के अनुसार लंका विजय के बाद जब बजरंगबली अत्यधिक थक गये थे तो माता सीता के कहने पर संगम तट पर विश्राम करने को लेट गये थे। संगम स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की भी मान्यता है कि यहां दर्शन किए बिना संगम स्नान अधूरा ही माना जाता है। यह धार्मिक स्थल त्रिवेणी संगम के मात्र एक किमी की दूरी पर स्थित है। 
तत्पश्चात नागवासुकी मंदिर के दर्शन किए जो गंगा के तट पर दारागंज क्षेत्र में स्थित है। यह मंदिर नागों के राजा भगवान वासुकी को समर्पित है। पौराणिक इतिहास के अनुसार जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया था तब मंदरांचल पर्वत को मथनी और वासुकी नाग को रस्सी के रूप में प्रयोग किया था। मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद अत्यन्त थक जाने और घायल हो जाने के बाद नागराज वासुकी ने इसी स्थान पर विश्राम किया था और भगवान शिव की तपस्या की थी। स्थानीय किदवंतीयो के अनुसार इस मंदिर की स्थापना ब्रह्मा के मानस पुत्रों ने की थी। इस ऐतिहासिक मंदिर का मूल प्रमाण 10वी शताब्दी से मिलता है, तत्पश्चात 18वी शताब्दी में इसका जीर्णोद्धार व निर्माण मराठा राजा श्रीधर भोसले ने करवाया था। यह भारत के उन चुनिंदा मंदिरों मे से है, जहां काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक यात्रा के अगले पड़ाव में अयोध्या रहेगी।

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