भगवान श्रीराम हर सनातनी के आराध्य देव हैं व रामलला का विशाल मंदिर करोड़ों हिन्दुओं की आस्था का केन्द्र बन चुका है। सरयू नदी में पवित्र स्नान कर रामलला के दर्शन कर हर हिन्दू खुद को भाग्यशाली मानता है। लाखों करोड़ों लोगों ने अपनी श्रद्धा से दान भगवान् श्रीराम को अर्पित किया, जो भगवान् श्रीराम के प्रति आस्था का प्रतीक है न कि किसी व्यक्ति की जेब भरने के लिए है। यदि इस चंदे में गबन या अनियमितता के आरोप लगे और यह सही साबित होते हैं तो इसे मात्र प्रशासनिक लापरवाही नहीं माना जाता। इस आलेख को राजनीतिक चश्मे से न देखे क्योंकि राजनीति करने के तो बहुत ही मुद्दे हैं, इसको सामाजिक व सनातनी की आस्था के चश्मे से देखें। इस घटना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया लेकिन अभी तक इस मामले में कोई एफआईआर नहीं हुई है, जो सरकार व राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों की मंशा पर प्रश्न चिन्ह खड़े करता है। रामलला का भव्य मंदिर कोई ईंट गारे से बनी ईमारत नहीं बल्कि यह राष्ट्रीय चेतना और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है। यदि चंदा चोरों पर योगी स्टाइल में कार्यवाही नही हुई तो बुलडोजर बाबा पर से आमजन का विश्वास उठ जायेगा। चंदा चोरी में जो भी कर्मचारी या ट्रस्ट का पदाधिकारी लिप्त है तो उनके नाम पूरी पारदर्शिता बरतते हुए सार्वजनिक होने चाहिए व ऐसी व्यवस्था का निर्माण होना चाहिए कि कोई ऐसी घटना को अंजाम देने का दुस्साहस न करें। हिंदु आस्था के सबसे बड़े केन्द्र प्रभु श्रीराम के मंदिर में ऐसी घटना देखकर पूरा देश स्तब्ध है। यदि देखा जाए तो इस लूट की तुलना गजनी के सोमनाथ मंदिर लूट से की जा सकती है। गजनी तो अफगान लुटेरा था लेकिन राम मंदिर में सेवादार ही चोरी करे तो यही कहा जा सकता है कि रक्षक ही भक्षक बन बैठे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं कि इतना बड़ा चोरी कांड बिना उच्च अधिकारी की मिली भगत बिना संभव नही या चोरों को रसूखदारों का संरक्षण मिला हुआ है। तभी मैंने उपर भी कहा है कि इसको राजनितिक चश्मे से न देखकर सनातनी की आस्था की दृष्टि से देखा जाना चाहिए व उन सभी व्यक्तियों के नाम उजागर होने चाहिए, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली और रसूखदार हो। मुख्यमंत्री योगी का इतिहास रहा है कि उन्होंने किसी अपराधी को बक्शा नहीं है, देश का आवाम भी इस प्रकरण में वैसी ही कार्यवाही की अपेक्षा योगी से करता है। देखा जाए तो राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण नै करोड़ों सनातनियो की आस्था को गहरा आघात पहुंचाया है। देश के शंकराचार्यो व विभिन्न संत समाज के संतो व सनातन बोर्ड के गठन की मांग की है ताकि मंदिरों में चढ़ावे व चढावे के पैसों का इस्तेमाल गौशालाओं, धर्मार्थ कार्यों और मंदिरों के विकास में ही खर्च हो। हर सनातनी इसे भगवान श्रीराम के सिध्दांतों, मर्यादा और जन विश्वास का अपमान मान रहे हैं। करोड़ों भक्तों का मानना है कि ईश्वर को अर्पित धन की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए।
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