कलियुग में भगवत भक्ति का सबसे श्रेष्ठ साधन है भगवान का नामोच्चारण: पं.प्रभुशरण तिवाड़ी

AYUSH ANTIMA
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चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): सेहीकलां स्थित नेत दादा मंदिर परिसर में पवित्र पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने कहा कि भगवान के नाम का उच्चारण मन के समस्त पापों को समाप्त करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि जब मनुष्य भगवान का नाम लेता है तो परमात्मा उसके हृदय में विराजमान होकर मन की कलुषितता को दूर करते हैं। कलियुग में भगवत भक्ति का सबसे श्रेष्ठ और सरल साधन भगवान के नाम का स्मरण एवं नामोच्चारण है। कथा के दौरान अजामिल प्रसंग के माध्यम से भगवान के नाम की महिमा का वर्णन किया गया। साथ ही स्वर्ग-नर्क, प्रह्लाद चरित्र, समुद्र मंथन एवं भगवान वामन अवतार की कथा का विस्तार से श्रवण कराया गया। इस अवसर पर रंगकर्मी सुरेश शेखावत द्वारा भगवान वामन की सजीव झांकी सजाई गई, जबकि राजू भगत एवं श्याम राणा ने भजनों की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिमय बना दिया। इससे पूर्व यजमान होशियारी लाल शर्मा ने सपत्नीक पंडित बाल कृष्ण चौरासिया के वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भागवत एवं व्यास पूजन किया। कार्यक्रम में पूर्व सरपंच शीशराम गोस्वामी सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला-पुरुष उपस्थित रहे।

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