रामलला को काल्पनिक मानने वाले आज मंदिर मे चढ़ावे व आभूषणों की चोरी को लेकर हमलावर आखिर क्यों है। हम राम को लेकर आये थे और परम राम भक्त होने का गौरव भी हमें ही प्राप्त है। लगता है कि यह करतूत नेहरु की है क्योंकि नेहरु सदैव मुस्लिम हितैषी रहे थे और उन्हीं की आत्मा आरोप लगाने वाले में प्रवेश कर गई, जो इस तरह के आरोप लगा रहे हैं। रामभक्त ऐसा कुकर्म कर ही नहीं सकते क्योंकि भगवान राम उनको नरक मे भी जगह नहीं देंगे। देश में हल्ला हो रहा है कि चंदा व आभूषण चोरी सनातनी आस्था से खिलवाड़ है लेकिन उनको शायद यह नहीं मालूम कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने महलों का त्याग कर जंगलों में राम भक्तों के लिए ही भटके थे और उनको आभूषणों व पैसों से कभी मोह नही रहा। यदि रामभक्तो ने उनका अनुसरण कर पैसे और आभुषणों को भगवान श्रीराम से अलग कर दिया तो सारे देश में हल्ला हो गया कि चोरी हो गई चोरी हो गई। चांदी की चरण पादुका इसलिए लेकर गये क्योंकि हम उन चरण पादुकाओ को लेकर भरत जैसी आस्था दिखाने के लिए लालायित थे क्योंकि हम भरत की तरह ही रामभक्त बनने को आतुर थे और उसी परम्परा का निर्वहन करते हुए हमने अपनी राम भक्ति का प्रदर्शन किया है। शायद स्वर्गीय बाल ठाकरे की आत्मा स्वर्ग से उन लोगो को धिक्कार रही होगी कि जिन्होंने राम भक्तों पर गोली चलाई वही आज रामभक्तो को बदनाम कर रहे हैं। अब रामराज्य आ गया। क्या रामभक्तो की 500 सालों की तपस्या उनको शायद नहीं दिखाई दी। इसी राम राज्य का तो इंतजार था कि कभी भगवान श्रीराम हमारी भी सुनेंगे और यदि भगवान श्रीराम ने हमारे अच्छे दिन ला दिये तो राम द्रोहीयो के तो पेट में दर्द होना ही था। भगवान् श्रीराम को अर्पित किये हुऐ पर यदि रामभक्तो का ही अधिकार नहीं होगा तो और किसका होगा। एक परम रामभक्त, जिन्होंने अपनी जिंदगी ही भगवान श्रीराम के नाम कर दी, ऐसे महामानव का नाम इस चोरी में घसीटना कहा तक उचित है। इस कलियुग में भी उस महामानव की सादगी की मिसाल दी जाती है। जिस अधिकारी के कार्यकाल मे रामभक्तो पर गोली चलाई गई थी, उनका हृदय परिवर्तन हुआ और उसका प्रायश्चित करने के लिए राम मंदिर में उन राम भक्तों की सेवा का प्रण लिया जो सदियों से रामलला को तंबू से निकाल कर भव्य मंदिर में देखना चाहते थे क्योंकि तंबू में तो देश के सनातनी चढ़ावा नहीं चढाते। भव्य मंदिर में जरूर उनकी आशा पूरी होगी और आखिर उनके भी तो अच्छे दिन आने चाहिए। राम द्रोहीयो से रामभक्तो के अच्छे दिन नहीं देखे जाते तभी तो अनर्गल आरोप लगा रहे हैं। आजकल एक बाबा पर्ची निकालने को लेकर बहुत ही चर्चित हो रहे हैं। उनके दरबार में दिग्गज नेता माथा टेकते देखे गये। एसआईटी के गठन की जरूरत ही नहीं थी बाबा को बोल देते चंदा चोरों के नाम उजागर होने मे एक मिनट भी नहीं लगता। उस बाबा के उपर भगवान् श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमानजी की असीम कृपा है और हनुमान जी की कृपा से ही वे लोगो की पर्ची निकालते हैं तो फिर हनुमान जी की कृपा से उनके परम आराध्य देव के मंदिर में जो चोरी हुई है तो चोरों के नामों की पर्ची और वह धन कहाँ छिपाकर रखा है, उसको बताने में इतना संकोच आखिर क्यों हो रहा है।
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