स्वास्थ्य विभाग की कार्य प्रणाली पर उठे सवाल, साबी नदी क्षेत्र में खुले में मिली राजस्थान सरकार की दवाइयां

AYUSH ANTIMA
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पावटा: राजनौता क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। साबी नदी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में "राजस्थान सरकार" अंकित सरकारी दवाइयां खुले में बिखरी हुई मिलीं, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त हो गया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि हाल ही में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में क्रमोन्नत हुए आयुष्मान आरोग्य मंदिर-सीएचसी राजनौता से संबंधित दवाइयां बिना नियमानुसार निस्तारण के खुले में फेंकी गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर मरीजों को अस्पतालों में कई बार आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पातीं, वहीं दूसरी ओर सरकारी दवाओं को इस प्रकार खुले में फेंकना गंभीर लापरवाही और सरकारी संसाधनों की बर्बादी को दर्शाता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नदी क्षेत्र में बड़ी संख्या में टैबलेट, सिरप, एंटीबायोटिक एवं अन्य औषधियां बिखरी पड़ी थीं। दवाइयों के पैकेटों और रैपरों पर राजस्थान सरकार का उल्लेख होने से इनके सरकारी स्टॉक का हिस्सा होने की संभावना जताई जा रही है। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्य प्रणाली और दवा प्रबंधन व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि खुले में पड़ी दवाइयां पशु-पक्षियों और आमजन के लिए खतरा बन सकती हैं। यदि मवेशी या बच्चे इनके संपर्क में आते हैं तो गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही बारिश के दौरान दवाइयों में मौजूद रासायनिक तत्व मिट्टी और जल स्रोतों को भी प्रदूषित कर सकते हैं। जानकारों के अनुसार एक्सपायरी अथवा अनुपयोगी दवाइयों का नियमानुसार वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाना चाहिए, लेकिन यहां ऐसा प्रतीत होता है कि नियमों की अनदेखी कर दवाइयों को खुले में छोड़ दिया गया। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन एवं चिकित्सा विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाए कि सरकारी दवाइयां वहां तक कैसे पहुंचीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी ऐसी लापरवाही सीधे जनता के जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है, इसलिए प्रशासन को इसे गंभीरता से लेकर तत्काल संज्ञान लेना चाहिए।

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