राजस्थान में पंचायत व नगर निकाय चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग पर से जनता का भरोसा उठ गया है। आमजन का एक ज्वलंत प्रश्न है कि जब चुनाव आयोग संवैधानिकता व स्वतंत्र संस्था है, फिर सरकार के इशारे पर क्यों काम कर रही है। चुनाव आयोग को निष्पक्ष होना चाहिए, जिससे लोकतंत्र को मजबूती मिल सके। हमारा संविधान भी चुनाव आयोग को स्वतन्त्र और निष्पक्ष रूप से कार्य करने का अधिकार देता है। विदित हो इन चुनावों को लेकर न्याय पालिका और विधायिका में टकराव देखने को मिल रहा है। माननीय राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने पहले आदेश में 15 अप्रेल 2026 तक चुनावी प्रक्रिया पूरी करने के साथ आदेश पारित किए थे तत्पश्चात दूसरे आदेश में 31 जुलाई 2026 तक चुनाव करवाने की अतिम समय सीमा निर्धारित की थी। भजन लाल शर्मा सरकार ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की आड़ में चुनाव टाल रही है लेकिन जब राजस्थान में उपचुनाव बिना ओबीसी रिपोर्ट के हो सकते हैं तो इन चुनावों में क्या अड़चन आ रही है। भाजपा सरकार के मंत्रियों के इन चुनावों को लेकर विरोधाभासी व अलग अलग बयान आ रहे हैं। एक मंत्री ने चुनाव करवाने में देरी को लेकर चुनाव आयोग को दोषी ठहराया है कि चुनाव करवाना चुनाव आयोग का काम है लेकिन तोता तो अपने मालिक की भाषा ही बोलेगा। दूसरे मंत्री का बयान कि चुनाव नवम्बर-दिसम्बर में संभव है, जो सीधे सीधे माननीय हाईकोर्ट की अवमानना बनती है। सूत्रों की मानें तो भजन लाल शर्मा सरकार इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। अब यदि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है तो मंत्री का यह बयान कि चुनाव करवाना चुनाव आयोग का काम है हास्यास्पद लगता है।
सुदृढ़ लोकतांत्रिक व्यवस्था में पंचायत राज संस्थाओं की अहम भूमिका होती है। यह गांव की वह संसद होती है, जिसमे जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि पंचायत या नगर निकायों में उनका प्रतिनिधित्व करते हैं। भजन लाल शर्मा सरकार का चुनाव न करवाना पंचायत राज संस्थाओं को कमजोर करने की दिशा में उठाया गया कदम ही कहा जायेगा। चुनाव न होने की दशा में गांवों व शहरों का विकास बाधित होता है, जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ता है। विपक्षी राजनीतिक दल कांग्रेस का आरोप है कि चुनावों में हार के डर से व फिर भजन लाल शर्मा की कुर्सी जाने के डर से चुनाव खिसकाते रहे हैं। रोजाना अखबाऱो में विज्ञापन के जरिये व नेताओं की तूफानी बैठकों में भजन लाल शर्मा सरकार के जन कल्याणकारी योजनाओ का बखान देखने को मिलता है। जब सरकार ने राजस्थान को देश का अग्रणी प्रदेश बना दिया है तो फिर आखिर सरकार चुनावों से घबरा क्यों रही है।