नूरी जामा मस्जिद के समीप, ईदगाह उस वक़्त ईमान की रौशनी से जगमगा उठा, जब ग़ौसे आज़म फाउंडेशन के चेयरमैन एवं चीफ़ क़ाज़ी, हज़रत मौलाना सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने नमाज़ से पहले अपने जोशीले, शोलाबार और दिलों को झकझोर देने वाले अंदाज़ में हज़ारों नमाज़ियों को खिताब किया। उनकी आवाज़ में दर्द था, अल्फ़ाज़ में आग थी और पैग़ाम में ऐसी सच्चाई कि हर दिल झूम उठा और हर आंखें नम हो गईं।
*रमज़ान इम्तिहान था, ईद उसका रिज़ल्ट है*
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने कहा कि रमज़ान रहमत, मग़फ़िरत और जहन्नम से आज़ादी का महीना था और आज ईद उस बंदे की है जिसने अपने गुनाहों को छोड़ा, अपने रब को राज़ी किया। उन्होंने कुरआन शरीफ़ की आयत का हवाला देते हुए कहा कि असली खुशी अल्लाह के फ़ज़्ल और रहमत पर मनाई जाए न कि सिर्फ नए कपड़ों, फैशन और दिखावे पर।
*ईद की सुबह, अल्लाह का आम माफ़ीनामा*
तक़रीर में सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने जोश के साथ बयान किया कि ईद की रात “लैलतुल जाइजाह” यानी इनाम की रात होती है। आज का दिन वह दिन है जब अल्लाह फरिश्तों के ज़रिये ऐलान करवाता है, ऐ उम्मते मोहम्मद! आओ, मांगो… आज कोई खाली नहीं जाएगा। यह सुनकर ईदगाह में “ सुब्हानल्लाह ” और “ माशा अल्लाह ” की सदाएं गूंज उठीं।
*खबरदार! ईद को गुनाहों का त्योहार मत बनाओ*
अपने बयान में सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने नसीहत भरे लहज़े में आगाह किया कि आज ईद का नाम लेकर गाने, नाच, फिज़ूलखर्ची और बेपरवाही… यह ईद नहीं, यह शैतान की जीत है। उन्होंने कुरआन की चेतावनी दोहराई, फ़िज़ूलखर्च करने वाले शैतान के भाई हैं।
*ईद या वईद, फैसला तुम्हारे आमाल करेंगे*
हज़रत उमर फ़ारूक़ का वाक़िया सुनाते हुए सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी की आवाज़ भर्रा गई। जिसके रोज़े-नमाज़ क़बूल हो गए, उसकी आज ईद है और जिसका सब रद्द हो गया, उसके लिए यही दिन वईद है।
*असल ईद, खुद को बदलने का नाम है*
सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने ज़ोर देकर कहा कि ईद नए कपड़ों का नहीं, नए किरदार का नाम है, दिल की सफाई का नाम है, अल्लाह को खुश करने का नाम है।
*अमन, भाईचारे और मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ*
तक़रीर के आखिर में सूफ़ी सैफुल्लाह क़ादरी ने मुल्क में अमन, भाईचारे और तरक्की के लिए ईदगाह में ख़ास दुआ कराई, जिसमें हज़ारों हाथ एक साथ उठे और आमीन की सदाएं गूंज उठीं।