भाजपा की चिड़ावा मंडल कार्यकारिणी विवादों के घेरे में

AYUSH ANTIMA
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गृह जिले झुंझुनूं के चिड़ावा भाजपा मंडल की कार्यकारिणी की घोषणा होते ही विवादों के घेरे में आ रही है। वैसे तो झुंझुनूं भाजपा संगठन का विवादों से पुराना नाता रहा है। झुंझुनूं जिलाध्यक्ष की ताजपोशी इसका एक ज्वलंत उदाहरण है कि मापदंड जो जिलाध्यक्ष के लिए निर्धारित थे, उनको दरकिनार कर हर्षिनी कुल्हरी को जिलाध्यक्ष बना दिया गया। इसको लेकर पूर्व प्रदेश प्रवक्ता ने तो यहां तक आरोप लगाया था कि उनका नाम पैनल में भी नहीं था। उसी का खामियाजा पूर्व प्रदेश प्रवक्ता को भुगतना पड़ा कि उनको बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वैसे चिड़ावा मंडल अध्यक्ष की घोषणा भी विवादों में रही थी कि कांग्रेस पृष्ठभूमि वाले नेता को मंडल अध्यक्ष पद दे दिया गया। इसको लेकर भाजपा के नेताओं ने प्रदेश स्तर तक इसकी शिकायत की थी लेकिन उसका कोई भी समाधान नहीं हुआ। अब चिड़ावा में मंडल कार्यकारिणी की घोषणा के साथ ही भाजपा कार्यकर्ताओं में आम चर्चा है कि अब भाजपा में निष्ठावान भाजपा के सिध्दांतों के प्रति समर्पण भाव वाले व पुराने कार्यकर्ताओं की कोई जगह नहीं है। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस समर्थित पार्षदों व जिन नेताओं ने एक महीने पहले ही भाजपा के खिलाफ सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से विरोध स्वरुप पोस्ट डाली थी, उनको महत्वपूर्ण पदों से नवाजा गया है। वैसे झुंझुनूं जिला आयाराम गयाराम की राजनीति को लेकर विख्यात रहा है। यहां के स्थानीय नेताओं का सिध्दांतों से कोई सरोकार नहीं है केवल सत्ता के साथ रहना ही उनके सिध्दांत रहे हैं। यहां मोदी का पुतला जलाने वाले व एलजेपी व बसपा से आने वाले नेताओं को संगठन में प्रमुख पद मिल जाते हैं तो उक्त कार्यकारिणी की तो बिसात ही क्या है। वर्तमान जिलाध्यक्ष उन नेताओ को मंच पर स्थान देती है, जो आयातित नेता हैं। पुराने व निष्ठावान कार्यकर्ता केवल भीड़ तंत्र का हिस्सा बनकर रह गये है। जिलाध्यक्ष तो इस बात से भी अनभिज्ञ हैं या जानबूझ कर ऐसा कर रही है कि मिडिया प्रभारी नियुक्त होने के बावजूद जिस नेता को इसकी जिम्मेदारी नहीं है, वह समाचार पत्रों में समाचार देने के लिए अधिकृत है। गुटबाजी का आलम यह है कि झुंझुनूं जिले के शहर मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति अभी तक जिलाध्यक्ष नहीं कर पाई है। वैसे उपरोक्त प्रकरण बहुत ही गोण हो जाता है, जब भाजपा भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की माला जपने वाली ने विपक्ष के करीब 25 नेताओं को अपनी शरण में ले लिया है, जिन पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से लेकर सारे भाजपा के नेता उनको सार्वजनिक रूप से कोसते रहे हैं। उनमें स्वर्गीय अजीत पवार, प्रफुल्ल पटेल, अशोक चव्हाण, हेमंत विस्वा सरमा, शुभेंदु अधिकारी, नवीन जिंदल व जी जनार्दन रेड्डी प्रमुख हैं।

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