*रात्रि को दवाई नहीं पर कहीं भी कभी भी मिल जाएगी शराब

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (जय नारायण बिस्सा): सरकार के आदेश और नियमों की शराब ठेकेदार और जिम्मेदार खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। शहर से लेकर देहातों तक में रात्रि 8 बजे के बाद और सुबह 10 बजे से पहले कभी भी शराब आसानी से उपलब्ध हो रही है। ठेकों का बंद होना सिर्फ एक दिखावा ही साबित हो रहा है। यह कहानी अभी से नहीं बल्कि निरंतर जारी है। जिम्मेदार आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन सब देखकर भी अनजान बने हैं। सोचने योग्य बात है कि बिना संरक्षण के यह धंधा अवैध समय में कैसे फल-फूल सकता है। शहर में किसी बीमार व्यक्ति को दवाई हर जगह न मिले...लेकिन शराब कभी भी और कहीं भी मिल जाएगी। यह कटु सत्य है...। आबकारी नियमानुसार शराब के ठेके खुलने का समय सुबह 10 बजे से रात्रि 8 बजे तक का है, जिसके पालन को सरकार भी सख्त है और समय-समय पर आबकारी विभाग को हिदायत भी दी जाती है लेकिन शहर से लेकर देहातों तक में इस नियम का पालन कराने वाला कोई नहीं दिख रहा। हालात यह है कि सुबह 10 बजे और रात्रि 8 बजे ठेका बंद होने के बाद भी शराब की बिक्री अवैध तरीके से की जा रही है। सुबह से ही शराब लेने वालों का जमावड़ा ठेकों पर दिखाई देने लगता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इस अवैध समय में शराब बेचने से शराब माफिया को दोगुना फायदा होता है। एक तो ठेका बंद होने के बाद शराब की बिक्री देर रात तक जारी रहती है और दूसरा शराब पर प्रिंट रेट से भी ज्यादा राशि शराब माफिया वसूल करता है। जानकारी के अनुसार एक पव्वा पर 20 रुपए तो अध्धी पर 40 रुपए और बोतल पर 60 से 70 रुपए अतिरिक्त वसूले जाते हैं।

*बिना संरक्षण कैसे खुल सकते हैं देर रात ठेके*

नियमों का पालन कराना जिम्मेदार विभाग का दायित्व होता है लेकिन शहर में शराब माफियाओं के आगे जिम्मेदार बेबस नजर आ रहे हैं। आबकारी विभाग और पुलिस प्रशासन सब देखकर भी अनजान बने हैं। कार्रवाई के नाम पर आबकारी विभाग कभी कभार देहातों में एक-दो कार्रवाई कर खानापूर्ति कर देता है पर यह कार्रवाई भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित होकर रह जाती है। हालात यह हैं कि पुलिस प्रशासन और आबकारी विभाग के आंखों तले अवैध रूप से शराब की बिक्री जोरों पर है। लोगों का कहना है कि बिना संरक्षण के देर रात्रि तक शराब के ठेके कैसे खुले रह सकते हैं।

*रात 8 बजे के बाद मोखले से मिलती शराब*

शराब ठेका के बंद होने का समय रात्रि 8 बजे है। इस दौरान लोग वैध तरीके से सीधे दुकान से शराब खरीदते हैं, लेकिन रात्रि 8 बजे ठेका बंद होने के बाद मोखले यानी (ठेका की दीवाल में किया सुराग) का रोल प्रारंभ होता है, जिसमें दो शराब माफियाओं का भी अहम किरदार होता है। एक माफिया ठेका के अंदर बैठा बैठा रहता है तो दूसरा ठेका के बाहर खुले में खड़ा रहता है। जो ठेके पर आने वाले लोगों से रुपए लेकर अंदर बैठे माफिया को शराब देने की बात कहता है, जिसके बाद अंदर बैठा माफिया मोखले में से में शराब की बोतल पास कर देता है।

*सस्ती शराब महंगे दामों पर*

शहर में शराब माफियाओं का राज अब से नहीं वर्षों से कायम है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अपनी जिम्मेदारी भूल दफ्तरों में बैठ अपनी नौकरी पका रहे हैं। रात्रि आठ बजते ही शराब माफिया सक्रिय हो जाते हैं। रात आठ बजे बाद शराब ठेके पर बैठा माफिया 180 रुपए की बीयर बोतल के 200 से 220 तक में बेच रहे हैं। इतना ही नहीं, शराब की बोतल पर 50 से 70 रुपए अधिक ले रहे हैं। हैरत की बात यह है शासन ने शराब के दाम बढ़ाए तक नहीं है फिर भी यह शराब माफिया अपने हिसाब से ही शराब के दाम वसूल कर रहे हैं। कई जगहों पर दिन में भी प्रिंट रेट से अधिक राशि वसूल की जा रही है, लेकिन आबकारी विभाग आंखें मूंद कर बैठा हुआ है।

*शहर में यहां बिकती देर रात तक शराब*

शहर के सारण पेट्रोल पंप के सामने, हरोलाई हनुमान मंदिर, एमएम ग्राउंड के पास, पुरानी गजनेर रोड, नोखा रोड, बीछवाल, मॉडर्न मार्केट, सादुल सिंह सर्किल, जेएनवीसी, जयपुर रोड, पवनपुरी, रानी बाजार औद्योगिक क्षेत्र, पूगल रोड सब्जी मंडी, करमीसर रोड, गंगाशहर, बीछवाल औद्योगिक क्षेत्र आदि में संचालित इन ठेकों सहित अन्य जगहों पर शराब देर रात तक आसानी से उपलब्ध हो रही है। इसके अलावा इनके आसपास दुकानों पर भी शराब की बोतलें, पव्वे, बीयर आदि रखी हुई है, जो बिक्री के लिये उपलब्ध रहती है। ऐसे में पुलिस की ओर से चलाए जा रहे नीलकंठ अभियान को धक्का है।

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