कोर्ट केस जीतने के बाद भी युवाओं की नियुक्ति खा रहे 'शातिर' बाबू; राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज परिवाद से मचेगा हड़कंप

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (जय नारायण बिस्सा): राजस्थान का चिकित्सा विभाग इस समय भ्रष्टाचार, बाबूशाही की तानाशाही और फर्जीवाड़े के ऐसे चक्रव्यूह में फंस चुका है, जहाँ न्याय की उम्मीद दम तोड़ रही है। एक तरफ देश की सर्वोच्च अदालत से जंग जीतने के बाद भी अभ्यर्थी को एक अदद नौकरी के लिए तरसना पड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के भीतर बैठे 'शातिर' बाबू फर्जी दस्तावेजों का ऐसा खेल खेल रहे हैं, जिसकी कोई सीमा नहीं है। अब इस पूरे नेक्सस (साठ गांठ) के खिलाफ एक बड़ा प्रशासनिक प्रहार हुआ है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पांचू में बिना एग्रीमेंट और बिना ब्रेक के वैधानिक रूप से कार्यरत सहायक लैब तकनीशियन किशन गोपाल छंगाणी ने पूरे घोटाले को उजागर करने के लिए 29 मई को राजस्थान संपर्क पोर्टल पर परिवाद क्रमांक ......6331 दर्ज करवाकर पूरी बाबूशाही को हिलाकर रख दिया है।

*सुप्रीम कोर्ट से जीती जंग, पर बाबू की 'प्रलोभन की भूख' के आगे बेबस सिस्टम*

भ्रष्टाचार का सबसे वीभत्स रूप जोधपुर के कैलाश सिंह भाटी (पुत्र शैतान सिंह भाटी, आवेदन क्रमांक: 18123277310) के मामले में देखने को मिलता है। प्रयोगशाला सहायक भर्ती—2018 के इस अभ्यर्थी के पास उम्मेद अस्पताल, जोधपुर के अधीक्षक द्वारा जारी (पत्र क्रमांक: 4722, दिनांक: 18/08/2022) 06 वर्ष 05 माह 28 दिवस के कार्यानुभव का पुनर्प्रमाणीकरण पत्र है।कैलाश सिंह ने न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काटे। जिसके चलते हाईकोर्ट सिंगल बेंच (13124/2023): अभ्यर्थी के पक्ष में फैसला। 
हाईकोर्ट डबल बेंच (डीबी 885/2024): चिकित्सा विभाग की करारी हार।
सुप्रीम कोर्ट (एसएलपी 36786/2025): सरकार की जिद पर देश की सबसे बड़ी अदालत ने पानी फेर दिया और विभाग यहाँ भी मुकदमा हार गया। हैरानी की बात देखिए, जहां देश की सर्वोच्च अदालत ने न्याय पर मुहर लगा दी, वहां विभाग के एक भ्रष्ट बाबू की 'प्रलोभन की भूख' इतनी बढ़ गई कि उसने कैलाश सिंह की नियुक्ति से जुड़ी फाइलें और दस्तावेज ही गायब कर दिए। पीडित ने 30/01/2026 को मुख्यमंत्री और एसीएस जन स्वास्थ्य तक को डाक से पत्र भेजा, लेकिन इस अंधेरगर्दी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
भर्ती-2018 के सभी अनुभव 

*प्रमाण-पत्रों की उच्च स्तरीय जांच की मांग*
जोधपुर के इसी दर्द और बीकानेर ज़ोन में चल रही बाबुओं की 'आंकड़ेबाजी' के खेल को देखते हुए अब सहायक लैब तकनीशियन किशन गोपाल छंगाणी ने सीधा और आर-पार का मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने श्रीमान संयुक्त निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं, बीकानेर-जोन से सत्यापित किए गए सभी अनुभव प्रमाण-पत्रों को जांच के दायरे में लाने की पुरजोर मांग की है। छंगाणी ने संपर्क पोर्टल पर दर्ज अपनी शिकायत में कड़े शब्दों में कहा है।"प्रयोगशाला सहायक भर्ती — 2018 के तहत जितने भी अनुभव प्रमाण-पत्र संयुक्त निदेशक कार्यालय बीकानेर जोन से सत्यापित किए गए हैं, उन सभी की एक उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच बैठाई जाए क्योंकि पर्दे के पीछे बैठकर फाइलों का परीक्षण करने वाले बाबुओं ने इसमें बड़े पैमाने पर आंखें मूंदकर कागजों का हेरफेर किया है।"
*अधिकारियों के विश्वास का कत्ल और 'खतरनाक सेटिंग नेटवर्क'*
 किशन गोपाल छंगाणी ने बताया कि यह महज़ तीन-चार लोगों का व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि एक व्यवस्थित प्रशासनिक अपराध है। उच्च अधिकारियों के पास काम का भारी बोझ होता है, जिसका फायदा उठाकर पटल पर बैठे बाबू (लिपिक) आँखें बंद करके फाइलों को आगे बढ़ाते हैं। इन बाबुओं की मंशा ही यही होती है कि अधिकारी उन पर आँख बंद करके विश्वास करें, हस्ताक्षर करें और बाद में जब फर्जीवाड़ा खुले, तो गाज उच्च अधिकारियों की साख पर गिरे।एक विभाग से दूसरे विभाग के बाबुओं के बीच का यह 'खतरनाक सेटिंग नेटवर्क' आज पूरी ईमानदारी को बदनामी के शिखर पर पहुँचा रहा है। इस साठगांठ का खामियाजा बिना एग्रीमेंट और बिना ब्रेक के ईमानदारी से काम करने वाले सच्चे कर्मचारियों और कैलाश सिंह जैसे हकदार अभ्यर्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
*दोषियों को निलंबित किया जाये*
परिवादियों ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग उठाई है। बताया जा रहा है कि राजस्थान संपर्क पोर्टल पर दर्ज परिवाद क्रमांक ......6331 के बाद अब उन बाबुओं की सांसें अटक गई हैं, जो अब तक फाइलों में 'टाइम ट्रेवल' और हस्ताक्षरों की 'लुका-छिपी' का गंदा खेल खेल रहे थे।

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