अंतर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस

AYUSH ANTIMA
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अंतर्राष्ट्रीय नर्सेज दिवस 12 मई को नर्सिंग समुदाय पूरी दुनिया में मनाता है क्योंकि इस दिन (12 मई 1820) को आधुनिक नर्सिंग की जनक फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म हुआ था।
दया एवं सेवा की प्रतिमूर्ति फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म उच्च वर्गीय, धनाढ्य ब्रिटिश परिवार में हुआ था लेकिन फिर भी उन्होंने सेवा मार्ग चुनकर असहाय और गरीबों की सेवा की। फ्लोरेंस नाइटिंगेल का सबसे महत्वपूर्ण योगदान 1854 में क्रीमिया के युद्ध में रहा क्योंकि इस युद्ध में उन्होंने पूरे दिन मरीजों की सेवा की और रात में भी मोमबत्ती ओर लालटेन के माध्यम से पूरी रात जागकर मरीजों की सेवा की, जिसके कारण इनको लेडी विद द लेंप की उपाधि से सम्मानित किया गया। उनकी प्रेरणा से ही नर्सिंग के क्षेत्र में महिलाओं के आगे आने की प्रेरणा मिली। 13 अगस्त 1910 को 90 वर्ष की आयु में इनका निधन हो गया था। आज के दिन भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदय द्वारा श्रेष्ठ सेवा कार्य करने वाली नर्सेज को राष्ट्रीय स्तर पर फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवॉर्ड से सम्मानित किया जाता है। आज के युग में नर्सों का योगदान नर्सिंग चिकित्सा के साथ साथ नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण है। हम जानते है कि नर्सों के बिना किसी भी अस्पताल में मरीजों का इलाज संभव नहीं है क्योंकि हम देखते है कि सरकारी अस्पतालों में पूरे जनरल वार्ड में 3,4 नर्स ही पूरे कार्य को संभालती है और ICU वार्ड में 3,4 नर्स करीब 15,20 मरीजों को संभालती है। डॉक्टर दवा लिखने के बाद नर्स ही मरीज की पूर्ण निष्ठा से सेवा करके अपना कर्तव्य निभाती है और हां, जहां तक हमारी जानकारी में आया है, आज तक नर्सों ने अपने निजी हित या निजी मांगो को लेकर कभी भी अस्पतालों में पूर्णतया कार्य का बहिष्कार नहीं किया है क्योंकि नर्स नर सेवा को नारायण सेवा समझकर कार्य करती है और इसका उदाहरण हमने कोरोना काल के समय देखा है, जब परिवार के सदस्य भी मरीज के पास जाने से डर रहे थे, उस समय भी नर्स अपनी जान की परवाह किए बिना मरीजों की सेवा में दिन रात लगी रही। आज भारत में करीब 39.40 लाख पंजीकृत नर्स है। भारत के 5310 प्राइवेट ओर सरकारी नर्सिंग संस्थानों से प्रतिवर्ष लगभग 3.80 लाख नर्सिंगकर्मी निकलते है, इसके बावजूद अस्पतालों में नर्सों पर काम का अत्यधिक दबाव होता है और निजी अस्पतालो में नर्सों को कम वेतन में कार्य करना पड़ता है।

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