जयपुर: राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा एक बेहद अहम मामले की सुनवाई करते हुए अनुसंधान अधिकारी द्वारा अभियुक्त को गिरफ़्तार किये जाने से पूर्व उसको गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए जाने के मामले को संवैधानिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होना मानते हुए अभियुक्त को तत्काल ज़मानत पर रिहा करने के आदेश दिए। उक्त संबंध में अभियुक्त की और से आपराधिक मामलों के वरिष्ठ अधिवक्ता इदरीश मुग़ल, आरबी शर्मा और दीपक शर्मा ने पैरवी की। पैरवी करते हुए न्यायालय को बताया गया कि अनुसंधान अधिकारी ने अभियुक्त को गिरफ़्तार किए जाने से पहले उसे गिरफ़्तार किये जाने के कारणों की जानकारी नहीं दी, ऐसी स्थिति में गिरफ्तारी अवैध हो गई। राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति को गिरफ़्तार किए जाने के संबंध में संविधान में वर्णित प्रक्रियाओं की पालना किये जाने को निष्पक्ष विचारण के लिए बेहद आवश्यक माना तथा अभियुक्त को गिरफ़्तार किए जाने की प्रक्रिया को दूषित मानते हुए अभियुक्त को ज़मानत लाभ प्रदान किया गया। इसके अलावा राजस्थान उच्च न्यायालय ने संबंधित अधीनस्थ न्यायालय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की क्रम संख्या 5 जयपुर महानगर प्रथम के विरुद्ध प्रक्रिया के पालन में कोताही बरतने के लिये मुख्य न्यायाधीश राजस्थान उच्च न्यायालय को आदेश की प्रति भेजकर उचित कार्रवाई किये जाने के संबंध में अनुशंसा की। इसके अलावा प्रकरण के अनुसंधान अधिकारी के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने के लिए पुलिस महानिदेशक राजस्थान व सरकारी वकील के ख़िलाफ़ कार्यवाही करने के निदेशक अभियोजन राजस्थान को निर्देश दिये गये।
राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोपी झबराराम को संवैधानिक प्रक्रिया पालन किए बिना गिरफ्तार किए जाने के मामले को माना बेहद गंभीर
By -
May 19, 2026
0
Tags: