डॉ.भीमराव अंबेडकर लॉ यूनिवर्सिटी की इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का समापन-देश विदेश के विख्यात विधिवेत्ता हुए सम्मिलित

AYUSH ANTIMA
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जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): डॉ.भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय एवं एसएस जैन सुबोध लॉ कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय "इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड सोशल जस्टिस फॉर विकसित भारत 2047" इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का समापन हुआ। अंबेडकर विधि विवि के जनसंपर्क सलाहकार विक्रम राठौड़ ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बदलते वैश्विक परिदृश्य में सामाजिक न्याय, विधिक उत्तरदायित्व, डिजिटल शासन तथा समावेशी विकास के विभिन्न आयामों पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सांझा मंच पर संवाद किया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि प्रोफेसर संदीप संचेती, वाइस प्रसिडेंट रिसर्च रिलेशन एण्ड ऐकडमिक अबेजडर, ऐलसवियर इण्डिया थे। समापन सत्र में प्रो.एमके भण्डारी विशिष्ट अतिथि, प्रो.निष्ठा जसवाल कुलगुरु, वीरेन्द्र कुमा वर्मा रजिस्ट्रार, प्रो.शोभारामज डीन, एसएस जैन सुबोध शिक्षा समिति के संयुक्त मन्त्री विनोद लोढा, सुबोध कॉलेज के संयोजक जितेन्द्र पटवा, प्राचार्य प्रो.गौरव कटारिया उपस्थित रहे। इस अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में विख्यात विधिवेत्ता, लॉ प्रोफेशनल, विद्यार्थी, शोधार्थी और विधि शिक्षाविद सम्मलित हुए। कॉन्फ्रेंस में संवैधानिक कानून, मानवाधिकार, साइबर कानून, पर्यावरण न्याय, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं विधि सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विभिन्न तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। कॉन्फ्रेंस में विभिन्न विधि विशेषज्ञ और प्रतिभागी अपने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए। प्रतिभागियों ने कानून एवं समाज के बदलते संबंधों, डिजिटल युग में न्यायिक चुनौतियों तथा मानवाधिकार संरक्षण जैसे विषयों पर गहन चर्चा की।अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के माध्यम से विभिन्न शिक्षाविद, न्यायविद, शोधार्थी और नीति एक्सपर्ट्स ने एक मंच पर विचारों, शोध निष्कर्षों और कानूनी दृष्टिकोणों का आदान-प्रदान किया। मुख्य अतिथि प्रो.संदीप संचेती ने अपने उद्बोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य तथा उसके मानव जीवन, व्यक्तिगत पहचान और सामाजिक संरचना पर पड़ने वाले व्यापक प्रभावों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता मानव जीवन को अधिक सुविधाजनक, तीव्र और व्यवस्थित बनाएगी, किन्तु इसके साथ ही यह निजता, साइबर सुरक्षा, नैतिकता, रोजगार और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े अनेक नए प्रश्न और चुनौतियाँ भी उत्पन्न करेगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी विकास तभी सार्थक है जब वह मानव मूल्यों, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ संतुलित रूप में आगे बढ़े। कुलगुरु प्रो.(डॉ.) निष्ठा जसवाल ने कहा कि यह आयोजन वैश्विक स्तर पर ज्ञान, शोध और नीति के साझा संवाद के साथ वैश्विक शैक्षणिक संवाद को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने इसे अम्बेडकर विश्वविद्यालय के लिए अकादमिक उत्कृष्टता, वैश्विक सहभागिता और ज्ञान आधारित समाज निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। यह कॉन्फ्रेंस से विधि शिक्षा एवं न्यायिक सुधारों की दिशा में उपयोगी सिद्ध हुई हैं।

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