काउंसलिंग प्रक्रिया में रिक्त पद दिखाने में किया सौतेला व्यवहार

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर: राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग में पदोन्नत व्याख्याताओं की काउंसलिंग में रिक्त पदों की गफलत ने पदस्थापन की पसोपेश बढ़ा दी है। दरअसल, विभाग ने शुक्रवार से पदोन्नत 12 हजार 141 व्याख्याताओं की काउंसलिंग की तैयारी तो कर ली है लेकिन पिछले साल व्याख्याता से पदोन्नत हुए 11 हजार 886 उप प्राचार्य अब तक पूर्व पदों पर ही यथावत नियुक्त हैं। ऐसे में शाला दर्पण में वे पद खाली प्रदर्शित नहीं होने से नव पदोन्नत व्याख्याताओं के लिए उनका पद उपलब्ध होने पर असमंजस उठ खड़ा हुआ है। काउंसलिंग में ये पद खाली नहीं मिलने पर पदोन्नत व्याख्याताओं के सामने दूर दराज की स्कूलों में नियुक्ति का खतरा भी मंडरा गया है।
*आठ महीने बाद भी नहीं हुआ पदस्थापन*
शिक्षा विभाग में पिछले साल सिंतबर महीने में 11 हजार 886 व्याख्याता पदोन्नत होकर उप प्राचार्य बने थे। उनका रिक्त पदों पर पदस्थापन करने की बजाय विभाग ने उन्हें यथावत ही कार्यग्रहण करवा दिया था। मामले कोर्ट में वाद के चलते आठ महीने बाद भी उनका पदस्थापन नहीं होने से वे अब भी पूर्ववत व्याख्याता पदों पर ही नियुक्त है। इससे काउंसलिंग में उनके पद खाली प्रदर्शित नहीं होने का खतरा मंडरा गया है।
*उल्टे क्रम से बिगड़ेगी व्यवस्था* 
शिक्षा विभाग पहले पिछले महीने पदोन्नत हुए व्याख्याओं की काउंसलिंग कर उनके पदस्थापन में जुटा है। जबकि यदि पहले पदोन्नत प्राचार्यों और उसके बाद पदोन्नत उप प्राचार्य और व्याख्याताओं का क्रम से पदस्थापन होता तो खाली होते पदों पर भी पदस्थापन के साथ पदस्थापित होने वाले शिक्षकों व स्कूलों दोनों को फायदा होता।
*चार हजार प्राचार्यों को भी इंतजार* इधर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लगने के लिए प्राचार्यों का इंतजार भी बढ़ता रहा है। उप प्राचार्य के साथ ये स्थिति पिछले साल मई महीने में उप प्राचार्य से पदोन्नत हुए करीब चार हजार प्राचार्यों की भी बनी हुई है। वे भी यथावत ही स्कूलों में नियुक्त है। उनका पद स्थापन भी करीब एक साल से अटका हुआ है। इससे उनमें सरकार के प्रति नाराजगी है।
*शिक्षक संघ रेसटा की मुख्य मांगें*
शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि पदोन्नत उप प्राचार्य को व्याख्याता पदों से अधिशेष मानते हुए इन पदों को व्याख्याता काउंसलिंग में शामिल किया जाए। काउंसलिंग के लिए रिक्त पदों की संख्या संबधित विषयों में नव पदोन्नत व्याख्याताओं के कुल पदों का 120 प्रतिशत खोला जाए, जो कि प्रति पदोन्नति पश्चात पदस्थापन में दिखाया जाता है, फिर नव पदोन्नत व्याख्याताओ के साथ यह भेदभाव क्यों किया। इतिहास, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित, हिंदी व राजनीतिक विज्ञान में रिक्त पदों की संख्या 120 प्रतिशत के अनुसार नहीं है। भौतिक विज्ञान विषय में श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, झुंझुनू जिलों के एक भी रिक्त पद नहीं दिखाया गया जबकि श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और बीकानेर जिले में भौतिक विज्ञान के शाला दर्पण पर 143 पद वर्तमान में रिक्त है। 
 *नव पदोन्नत व्याख्याताओ की साथ सौतेला व्यवहार*
शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावत का कहना है कि शिक्षा विभाग को सबसे पहले यथावत कार्यग्रहण करने वाले प्राचार्य एवं उप प्राचार्यों की काउंसलिंग करवानी चाहिए थी। तभी पदोन्नत व्याख्याताओं को काउंसलिंग का वास्तविक लाभ मिल सकता है लेकिन वर्तमान में दिखाएं रिक्त पदों में उप प्राचार्य बने व्याख्याताओं के पद नहीं दिखा करके नव पदोन्नत व्याख्याताओं की साथ सौतेला व्यवहार किया है, जो सही नहीं है। शिक्षक संघ रेसटा की मांग है कि विभाग को उप प्राचार्य के पदों को रिक्त मानते हुए काउंसलिंग में शामिल करना चाहिए।

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