सांसद व लोजपा के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल के बयान को लेकर भाजपा के शीर्ष नेताओं से लेकर जिला स्तर के नेताओं के विडियो वायरल हो रहे हैं कि हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री व उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों के लिए अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। मैं हनुमान बेनीवाल की उस भाषा को किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराता क्योंकि राजनीति में विचारधारा अलग होने के साथ मतभेद हो सकते हैं लेकिन भाषाई सुचिता किसी भी कीमत पर रसातल में नहीं जानी चाहिए। निश्चित रूप से बेनीवाल की भाषा लोकतांत्रिक नहीं थी और उसका समर्थन किसी भी हालातों में नहीं होना चाहिए। अब सिक्के के दूसरे पहलू पर आते हैं, जो भाजपा के नेता हनुमान बेनीवाल को मर्यादा का पाठ पढ़ा रहे हैं क्या ऐसे ही विडियो द्वारा राजस्थान सरकार के एक मंत्री को लेकर भी सोशल मिडिया पर डालने की हिम्मत दिखा सकते हैं। राजस्थान के सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक का पुलिसकर्मियों से कथित अभद्र व्यवहार व भद्दी भद्दी गाली गलोच वाला विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि आयुष अंतिमा (हिंदी समाचार पत्र) उस विडियो की सच्चाई को लेकर पुष्टि नहीं करता है लेकिन सूत्रों की माने तो इस प्रकरण को लेकर मंत्री दक के खिलाफ राजकार्य में बाधा डालने और धमकी देने को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है। इसके विपरीत मंत्री दक का वही चिर परिचित बयान आया है, जो हर नेता अपने बचाव में देता है कि इस विडियो में उनकी आवाज नहीं है बल्कि एसआई तकनीक की मदद से छेड़छाड़ करके बनाया है। सांसद व लोजपा के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल के बयान को लेकर भाजपा के शीर्ष नेताओं से लेकर जिला स्तर के नेताओं के विडियो वायरल हो रहे हैं कि हनुमान बेनीवाल ने मुख्यमंत्री व उनके मंत्रिमंडल के सहयोगियों के लिए अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया। मैं हनुमान बेनीवाल की उस भाषा को किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराता क्योंकि राजनीति में विचारधारा अलग होने के साथ मतभेद हो सकते हैं लेकिन भाषाई सुचिता किसी भी कीमत पर रसातल में नहीं जानी चाहिए। निश्चित रूप से बेनीवाल की भाषा लोकतांत्रिक नहीं थी और उसका समर्थन किसी भी हालातों में नहीं होना चाहिए लेकिन एक संवैधानिक पद पर विराजमान व्यक्तित्व से शालीन व मर्यादित भाषा की अपेक्षा की जाती है। यदि आरोप सही हैं तो यह पद की गरिमा के खिलाफ है। सार्वजनिक रूप से मंत्री का इस तरह का व्यवहार करने से प्रशासनिक व्यवस्था और पुलिस बल का मनोबल प्रभावित होता है। हालांकि विडियो को लेकर यह प्रकरण जांच का विषय है व पुलिस जांच व न्याय पालिका के निष्कर्ष के बाद ही प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
सांसद बेनीवाल व मंत्री दक के इस आचरण को किसी भी दृष्टि से उचित नहीं ठहराया जा सकता है लेकिन भाजपा के संगठन के नेताओं से एक ज्वलंत प्रश्न है कि जैसा उन्होंने बेनीवाल को लेकर सोशल मीडिया में विडियो डाले हैं, क्या मंत्री दक के लिए भी ऐसे विडियो डालने की हिम्मत दिखा पायेगे। विदित हो भाजपा संस्कारवान पार्टी के होने का दंभ भरती रही। दक के उस आचरण को लेकर भाजपा को अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है।