बड़ी ईदगाह में पक्षियों के लिये बांधे जल परिन्डे

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर: अपनी गंगा जमुनी संस्कृति के लिये देशभर में एकता की मिसाल बनी धर्मनगरी बीकानेर में अनेक धार्मिक व पुण्यार्थ आयोजन होते रहते है। इन आयोजनों के माध्यम से बेजुबान पशु पक्षियों के लिये भी राहत के कार्य किये जाते है। जहां पूरा देश धर्म व जाति के नाम पर आपसी खींचतान में दिखाई दे रहा है। वहीं बीकानेर में धार्मिकता से परे एकता अखंडता का संदेश देने का अभियान शुरू हुआ है, जहां सोमवार को बड़ी ईदगाह स्थल में पक्षियों के जल परिन्डे बांधकर बाल संत छैल बिहारी, ईदगाह कमेटी अध्यक्ष फरमान अली एवं शहर काजी शाहनवाज हुसैन ने गंगा जमुनी संस्कृति के साथ पक्षी सेवा का संदेश दिया। बेजुबान पक्षियों परिंदों की सेवार्थ अभियान में बाल संत डॉ.श्रीछैल विहारी महाराज द्वारा 24 दिनों में 9400 परिन्डों का वितरण किया गया है। नयाशहर क्षेत्र में स्थित बड़ी ईदगाह स्थल  पर बडी ईदगाह में कमेटी अध्यक्ष हाजी फरमान अली ओर शहर काजी शाहनवाज हुसैन के मुख्य आतिथ्य उपस्थिति एवं प्रिंसिपल हरिकिशन नागल, मोहम्मद तारिक, अनवर नौशाद अली, अयान रंगा, आदर्श मोटीयार विशिष्ट आतिथ्य में बड़ी ईदगाह के पेड़ों पर जल परिन्डे बांधने के साथ भीषण गर्मी में जीवदया ओर पक्षियों की सेवा का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का सेवा कार्य किया गया। पक्षी सेवा अभियान संयोजन कर्ता मनु महाराज ने बताया कि नयाशहर बड़ी ईदगाह कमेटी अध्यक्ष फरमान अली ने फऱमाया कि युवा सेवाभावी बाल संत द्वारा निस्वार्थ भाव से भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षियों की जल सेवार्थ शहर के हर क्षेत्र हर जात धर्म के साथ परिन्डे बांधने और परिन्डे वितरण का अभियान जीवों के प्रति दया, प्रेम, करुणा का धरातल पर बहुत बड़ा सत्कार्य है। ऐसे में हर जाति धर्म के ऐसे सेवा कार्य संदेश संसार में गंगा जमुनी संस्कृति और तहजीब की मिसाल है। बीकानेर शहर काजी शाहनवाज हुसैन ने कहा कि बाल संत डॉ.श्रीछैल विहारी महाराज द्वारा पक्षी सेवा बीकानेर की गंगा जमुनी तहजीब की पावन धरती पर धर्म जाति से उपर उठकर सोचने वाला वास्तविक श्रेष्ठ सत्कार्य है। बाल संत डॉ.श्रीछैल विहारी महाराज ने कहा कि जाति धर्म मजहब पंथ से ऊपर उठकर निस्वार्थ भाव से सबको समान रुप से आदर करते सेवा हुए की गई सेवा ही सार्थक है।। बाल संत द्वारा निराश्रित पशु ओर बेजुबान पक्षियों के प्रति की गई सेवा संसार सागर में राग, द्वेष रहित कोमी एकता की सर्वोच्च मिसाल कायम करती है क्योंकि पशु पक्षियों की कोई जात नहीं होती है। हर धर्म और मजहब, सेवा, त्याग, समर्पण का सही संदेश दे देता है।

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