झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): आध्यात्मिक नगरी झुंझुनूं में मंगलवार को भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। स्मृतिशेष श्रीमती सुवादेवी एवं श्री डूंगरमल जी पाटोदिया के दिव्य स्मरण में आयोजित सात दिवसीय 'श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ' का दूसरा दिन अत्यंत मनोहारी और भक्तिपूर्ण रहा। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
*कथा व्यास के ओजस्वी प्रवचन*
कथा के दूसरे दिन प्रख्यात कथा व्यास श्री दुर्गादत्त जी व्यास (बीकानेर) ने अपने ओजस्वी मुखारविन्द से श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कराया। उन्होंने भक्तों को मोह-माया और अहंकार का त्याग कर प्रभु की शरण में जाने का मार्ग प्रशस्त किया। व्यास जी ने कथा के दौरान राजा परीक्षित के जीवन के उन महत्वपूर्ण पड़ावों को उजागर किया, जो मनुष्य को जीवन की नश्वरता और भक्ति की महत्ता समझाते हैं।
* कथा के मुख्य बिंदु: राजा परीक्षित का प्रायश्चित और शुकदेव जी का आगमन
कथा व्यास ने द्वितीय दिवस की कथा में निम्नलिखित प्रसंगों पर प्रकाश डाला।
* राजा परीक्षित का अपराध: कलियुग के प्रभाव में राजा परीक्षित का ध्यान भटकना और अनजाने में ध्यानस्थ शमीक ऋषि के गले में मरा हुआ सर्प डाल देना।
* ऋषि पुत्र का शाप: शमीक ऋषि के पुत्र द्वारा शाप दिया जाना कि सातवें दिन तक्षक नाग राजा को डस लेगा।
* राजा का प्रायश्चित: अपनी
गलती का आभास होते ही राजा परीक्षित का राजपाट त्याग कर गंगा तट पर संतों की शरण में जाना।
शुकदेव जी का आगमन: राजा के उद्धार के लिए महान ज्ञानी शुकदेव जी महाराज का व्यासपीठ पर आगमन और भागवत महात्म्य का भक्तिपूर्ण प्रारंभ।
आगामी कार्यक्रम एवं समय
यह सात दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव 31 मई 2026 तक निरंतर जारी रहेगा। कथा का दैनिक समय दोपहर 2:15 बजे से सायं 6:15 बजे तक निर्धारित है। इस पुनीत आयोजन को सफल बनाने में श्रीमती सुशीला देवी एवं जुगलकिशोर पाटोदिया के कुशल मार्गदर्शन में पूरा पाटोदिया परिवार तन-मन-धन से जुटा हुआ है। इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में समस्त परिजन व मित्रगण पूर्ण निष्ठा से सेवा कार्य में संलग्न हैं।
इस भक्ति महोत्सव में शहर के अनेक गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।