राष्ट्रभक्ति दिखाने का अवसर: पेट्रोल डीजल के दामों में बढ़ोतरी को लेकर जमीन तैयार

AYUSH ANTIMA
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तेलंगाना की धरती से यह संदेश दिया कि अमेरिका ईरान के युद्ध के चलते पेट्रोल डीजल व गैस की खपत पर नियंत्रण करें व सोने के जेवरात एक साल तक नहीं खरीदने की अपील भी की। मोदी ने पेट्रोलियम उत्पादों को लेकर जो चिंता व्यक्त की है, उसके परिणाम आने वाले दिनों में इनके दामो में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मोदी का सोने के जेवरात न खरीदने के पीछे तर्क दिया कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। युद्ध के चलते कच्चे तेल के भाव लगातार बढ़ रहे हैं। मोदी ने इस बचत को लेकर देशभक्ति की नई परिभाषा गढ़ी है कि जो व्यक्ति तेल व सोने की बचत करेगा देशभक्त कहलायेगा। यह आम चर्चा थी कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनावो के बाद तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होगी, जिसकी जमीन मोदी ने तैयार कर दी है। निश्चित रूप से यह एक वैश्विक संकट है और इस संकट का सामना करने को लेकर देशवासियों को एकजुटता का परिचय देना चाहिए। देखा जाए तो मोदी की यह अपील विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए सार्थक मानी जा रही है क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात करता है। पेट्रोल डीजल की बचत को लेकर उन्होंने पब्लिक ट्रांसपोर्ट का सहारा लेने व वर्क फ्रोम होम प्रणाली को अपनाने की सलाह दी। इसके साथ ही लोगों को एक साल तक विदेश यात्रा न करने की सलाह भी दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की इस अपील को तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की देश के देशवासियों की अपील के संदर्भ में देखे, जब 1965 में भारत पाक युद्ध के दौरान देश में अनाज के गंभीर संकट और अमेरिकी दबाव के बीच लाल बहादुर शास्त्री ने देशवासियों से सप्ताह में एक दिन सोमवार को एक समय उपवास रखने की अपील की थी। शास्त्री जी ने यह बात पहले खुद पर लागू करते हुए अपने परिवार में एक समय का भोजन त्याग कर देशवासियों के समक्ष उदाहरण प्रस्तुत किया तो देशवासियों ने सोमवार को खाना छोड़ दिया और इसे शास्त्री व्रत की संज्ञा दी गई। जैसा उदाहरण शास्त्री जी ने अपने परिवार के साथ व्रत रखने का दिया, क्या आज के राजनेता ऐसा उदाहरण प्रस्तुत कर सकते हैं। इस देश का हर व्यक्ति देशभक्ति से ओतप्रोत है और इसको लेकर सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं। अतीत गवाह है कि जब देश पर संकट आया है तब सोना खरीदना तो दूर लोगों ने अपना सोना सरकार को दान कर दिया था। ऐसा देशभक्ति का जज्बा केवल एक भारतीय देशभक्त का ही हो सकता है। देश में नेताजी के दौरों के साथ सैकड़ों गाड़ियों का काफिला दिखाई देता है, इसके साथ ही भीड़ इकठ्ठा करने के लिए हजारों वाहन लग जाते हैं, क्या यह गाडियां पानी से चलती है। जो आदर्श लाल बहादुर शास्त्री ने देश के समक्ष पेश किया था, क्या वही आदर्श आज के नेताजी रख सकते हैं।

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