ब़ंगाल में पहली भारतीय जनता पार्टी की सरकार की कमान अब शुभेन्दु अधिकारी के हाथों में आ गई है। गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में विधायक दल की बैठक में शुभेन्दु अधिकारी के नाम पर मोहर लगाई गई। ममता बनर्जी को दो बार हराने वाले शुभेन्दु अधिकारी के समक्ष कानून व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा व उधोगों की वापसी जैसे प्रमुख मुद्दे होंगे। बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अगर टीएमसी के किले को ध्वस्त करते हुए सत्ता तक पहुचने में कामयाबी हासिल की है तो काफी हद तक इसका श्रेय शुभेन्दु अधिकारी को ही जाता है। शुभेन्दु अधिकारी को 2020 तक पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नंबर दो माना जाता था लेकिन पार्टी मे अभिषेक बनर्जी के बढते प्रभाव ने धीरे धीरे उनको हासिए पर धकेल दिया तत्पश्चात् 2021 में चुनावो से पहले उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा का अंग, बंग और कलिंग पर सत्ता पर काबिज होने का सपना अब बंग पर काबिज होकर पूरा कर लिया। अंग और कलिंग यानी बिहार और उड़ीसा पर पहले ही भगवा फहरा दिया था। पार्टी के सत्ता प्राप्ति के सपने को पूरा करने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह जैसे दिग्गज नेताओं ने आक्रामक चुनावी रैलियां की थी। नंदीग्राम आंदोलन के प्रेरणास्रोत रहे अधिकारी, जब उस आंदोलन के समय वह दौर था, जब हल्दिया में सीपीएम नेता लक्ष्मण सेठ की तूती बोलती थी लेकिन शुभेन्दु अधिकारी की रणनीति के चलते सेठ को हार का मुंह देखना पड़ा था। अधिकारी की राजनैतिक महत्वाकांक्षा थी कि उन्होंने टीएमसी से नाता तोड़कर भाजपा का दामन थामा था लेकिन उनके विरोधियों का मत है कि उन्होंने ईडी व सीबीआई के डर से भगवा दुपट्टा गले में डाल लिया था। अब अधिकारी के समक्ष चुनौतियों में अवैध प्रवासन, कानून व्यवस्था व भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना प्रमुख है। अवैध प्रवासन के मुद्दे को इन चुनावों में प्रमुखता से उछाला गया था। इसलिए अधिकारी को इससे निपटना होगा। राज्य में कट मनी संस्कृति को समाप्त करने के साथ ही उधोगों को पुनर्जीवित कर रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ ही खराब बुनियादी ढांचे में सुधार उनकी प्राथमिकताएं होनी चाहिए। भाजपा का सत्ता में आना एक बहुत ही सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। ममता बनर्जी को उन्हीं के हथियारों से धराशाई करने में भाजपा का पूरा फोकस रहा व टीएमसी के दिग्गज नेताओं के लिए भाजपा ने अपने दरवाजे खोल दिए। भाजपा में एक कहावत है कि एक दरी बिछाने वाला भी प्रदेश का मुख्यमंत्री बन सकता है। यह बयान गृह जिले झुनझूनू की जिलाध्यक्ष ने भजन लाल शर्मा के लिए दिया था, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसके उलट बंगाल में पुराने भाजपा नेताओं में राहुल सिन्हा, दिलिप घोष, सत्यव्रत मुखर्जी, बादल भट्टाचार्य, तथागत राय व शमिक भट्टाचार्य जैसे नेताओं ने दरिया बिछाने का काम किया, उन्हें दरकिनार कर टीएमसी से आये अधिकारी के हाथों बंगाल की कमान सौंपना भाजपा की कथनी और करनी में अंतर स्पष्ट करता है।
3/related/default