राजस्थान में भजन लाल शर्मा सरकार के उदय होने के पीछे यही तर्क था और एक चुनावी मुद्दा भी कांग्रेस राज में भ्रष्टाचार चरम पर था। राजस्थान के काबीना मंत्री कन्हैया लाल चौधरी का एक बयान बहुत ही हास्यास्पद व चौंकाने वाला है, जिसमें उन्होंने कहा कि भ्रष्ट अफसरों को यदि घर भेजा तो पूरा विभाग खाली हो जाएगा। यह बयान उनकी प्रशासनिक विफलता को ही प्रदर्शित नहीं करता बल्कि भजन लाल शर्मा सरकार के भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टोलरेंस मिशन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस बयान से यह साबित होता है कि सरकार भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई करने को लेकर लाचार ही नहीं बल्कि उनके समक्ष दंडवत होकर समर्पण कर दिया है। देखा जाए तो पेयजल जैसी मूलभूत आवश्यकता को लेकर सरकार कितनी संवेदनशील है, उसका ज्वलंत उदाहरण आमजन को देखने को मिला। मंत्री के इस बयान ने सरकार को भ्रष्ट सिस्टम के पास गिरवी रख दिया है। अब सरकार ने मान लिया कि भ्रष्ट तंत्र पूरे सिस्टम को खोखला कर रहा है और सरकार मूकदर्शक होकर देख रही है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा पेपर लीक व जल जीवन मिशन योजना घोटाले को लेकर बार बार कह चुके हैं की भ्रष्टाचारी चाहे कितना भी रसूखदार हो, उसे जेल की सलाखों के पीछे जाना ही होगा। मंत्री का यह बयान उन ईमानदार अफसरों की ईमानदारी पर करारा तमाचा है, जो भ्रष्टाचार के इस चक्रव्यूह में अभिमन्यु की तरह डटकर खड़े हैं और सिस्टम को सुधारने में प्रयासरत हैं। यदि सरकार भ्रष्टाचारियों के आगे लाचार है तो यह भजन लाल शर्मा सरकार की विफलता का एक जीवंत उदाहरण है। अब अफसर मजे से आमजन के पैसों को चूना लगाने में परहेज़ नहीं करेगे क्योंकि ऐसा करने के लिए कैबिनेट मंत्री ने हरी झंडी दे दी है। यदि झुन्झुनू जिले खासकर पिलानी विधानसभा की बात करें तो ट्यूबवेल की खुदाई से लेकर चालू करने में इतना भ्रष्टाचार है कि इसको मापने के लिए कोई मीटर ही नहीं बना। सही मोटर और केबल को खराब दिखाकर बिल उठाने के मामले भी देखे गये है। इस भ्रष्टाचार को लेकर यही कहा जा सकता है कि इस बंदरबांट में नेताओ का भी हिस्सा रहता है तभी कमाऊ पूतो को बचाने वाला बयान मंत्री ने दिया है। यदि यही बयान मंत्री जी ने विधानसभा में दिया होता तो सत्तापक्ष के विधायक मेजे थप थपाकर हौसला बढ़ाते और शायद मोदी मोदी के नारे भी सुनने को मिलते।
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