निवाई (लालचंद माली): पीपलू उपखंड की ग्राम पंचायत सोहेला स्थित एक ढाबे के पीछे हजारों टन मिट्टी का अवैध स्टॉक किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि किसान कंस्ट्रक्शन कंपनी के ठेकेदार द्वारा बिना खनिज विभाग की एसटीपी (शॉर्ट टर्म परमिट) के बड़े पैमाने पर मिट्टी का खनन कर खुलेआम ढेर लगा दिया गया, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक मूकदर्शक बने हुए हैं। यह अवैध स्टॉक जिला परिवहन कार्यालय से महज एक किलोमीटर, हल्का पटवारी और गिरदावर क्षेत्र से करीब 500 मीटर तथा वन विभाग क्षेत्र से भी लगभग 500 मीटर की दूरी पर स्थित है। इसके बावजूद जिला खनिज विभाग, बरोनी थाना पुलिस, पीपलू तहसील प्रशासन और संबंधित अधिकारी कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं।
ग्रामीण रामराज, धनराज, गोविंद, हरलाल आदि ने बताया कि रात-दिन ढाबों और नेशनल हाईवे-52 पर प्रशासन के नुमाइंदे घूमते नजर आते हैं। बरोनी थाना पुलिस के जवान और अधिकारी इसी ढाबे पर खाना खाने आते हैं और उनके सामने ही मिट्टी से भरे वाहन खाली होते हैं, फिर भी कोई रोक-टोक नहीं होती। ग्रामीणों का आरोप है कि जिला खनिज विभाग स्वयं कार्रवाई करने के बजाय शिकायत का इंतजार करता रहता है। जब सब कुछ खुलेआम हो रहा है, तो फिर शिकायत की जरूरत क्यों पड़ रही है, इससे विभागीय मिली भगत की आशंका और गहरी हो जाती है। सूत्रों के अनुसार खनिज विभाग के कुछ अधिकारियों द्वारा यह तक कहा गया कि ठेकेदार को “खुली छूट” है और वह जितनी चाहे मिट्टी उठा सकता है। यदि यह सच है, तो यह नियमों की खुली अनदेखी है। राजस्व नियमों के अनुसार खातेदार अपनी कृषि भूमि पर 3 फीट से अधिक गहराई तक खुदाई नहीं कर सकता। अपनी खातेदारी भूमि से निकली मिट्टी का उपयोग केवल खेत समतलीकरण, मेड़बंदी, सिंचाई सुधार, तालाब निर्माण या अन्य कृषि कार्यों के लिए किया जा सकता है। व्यावसायिक बिक्री या ठेकेदारी कार्यों में उपयोग के लिए नहीं।
एक ओर प्रशासन बनास नदी में छोटे खननकर्ताओं पर सख्ती दिखाता है, वहीं दूसरी ओर बड़े ठेकेदारों पर नरमी कई सवाल खड़े कर रही है। अब जनता पूछ रही है—क्या कानून सिर्फ छोटे लोगों के लिए है, या बड़े ठेकेदारों के लिए अलग नियम बनाए गए हैं।