अग्रवाल की पंत पर अटक रही है सूई: चीफ इंजीनियर मनीष बेनीवाल लपेटे में

AYUSH ANTIMA
By -
0



जल जीवन मिशन में 900 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच अब एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ी हुई है, जहां बयानों की तीरंदाजी ने प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सेवानिवृत्त आईएएस सुबोध अग्रवाल ने पूछताछ के दौरान अपनी रक्षात्मक रणनीति को बेहद आक्रामक रूप देते हुए सीधे तौर पर वर्तमान मुख्य सचिव सुधांश पंत को अपने निशाने पर लिया है। अग्रवाल का यह तर्क कि यदि व्यवस्था पूरी तरह ईमानदार है तो उन चेहरों से परहेज क्यों किया जा रहा है, जिनके कार्यकाल में टेंडर की विवादित प्रक्रियाएं परवान चढ़ीं। वे स्पष्ट रूप से यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार की जड़ें केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकतीं, बल्कि इसकी जवाबदेही का दायरा उन सभी तक फैलना चाहिए, जिन्होंने फाइल पर अपने हस्ताक्षर अंकित किए हैं। ​अग्रवाल ने अपनी सफाई में खुद को एक ऐसे सतर्क अधिकारी के रूप में पेश किया है, जिसने फर्जी फर्मों के खिलाफ कठोर कदम उठाते हुए उन्हें ब्लैकलिस्ट किया और एफआईआर दर्ज कराई। उनका तर्क था कि जब तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर अनियमितताएं पहले से ही जड़ें जमा चुकी थीं, तो उस समय फाइलों को हरी झंडी देने वाले अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच अनिवार्य है। इसी सिलसिले में उन्होंने जलदाय विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता मनीष बेनीवाल का नाम लेकर यह संकेत दिया है कि इस पूरे तंत्र में केवल शीर्ष स्तर ही नहीं, बल्कि तकनीकी निर्णय लेने वाली कड़ियां भी उतनी ही जिम्मेदार हैं। ​हालांकि, अग्रवाल की इस मुखरता के बीच एक गहरी चुप्पी भी है, जो कई सवाल खड़े करती है। एक ओर जहां वे नौकरशाही के वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं, वहीं पूर्व मंत्री महेश जोशी के नाम पर उनकी खामोश रणनीति राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। अग्रवाल का यह रुख, जिसमें वे खुद को पाक-साफ बताते हुए जांच की दिशा को प्रशासनिक ढांचे की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहे हैं, निश्चित रूप से जांच एजेंसियों के लिए नए सवाल पैदा करता है। अब यह पूरी तरह जांच की सूक्ष्मता और साक्ष्यों की मजबूती पर निर्भर करेगा कि क्या एजेंसियां इन आरोपों की गहराई तक जाकर वास्तविक गुनहगारों तक पहुंच पाती हैं या यह मामला केवल दोषारोपण की फाइलों में उलझकर रह जाता है। फिलहाल, अग्रवाल के इन तीखे तेवरों ने इस घोटाले की जांच के दायरे को और अधिक विस्तृत कर दिया है।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!