झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): सिंघानिया विश्वविद्यालय, पचेरी बड़ी में संस्थापक स्वर्गीय श्री डीसी सिंघानिया की प्रतिमा का भव्य अनावरण समारोह गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक स्वागत एवं तिलक के साथ हुआ। इस अवसर पर गणमान्य अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण किया गया। कार्यक्रम मे हरि खेमका (चेयरमैन, आदित्य इन्फोटेक लिमिटेड–सीपी प्लस) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उनके साथ विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रो. (डॉ.) यतीश अग्रवाल (वाइस चांसलर, जीएस यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश), डॉ.महासिंह राव (द्रोणाचार्य पुरस्कार प्राप्त रेसलिंग प्रशिक्षक) एवं डॉ.दिलीप मोदी (अध्यक्ष, मोदी वर्ल्ड स्कूल, झुंझुनू) ने कार्यक्रम में शिरकत की। इसी दौरान हरि खेमका एवं संस्थान के चेयरमैन रवि सिंघानिया के कर कमलों द्वारा प्रतिमा का अनावरण किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता चेयरमैन रवि सिंघानिया ने की।
इसी अवसर पर सिंघानिया संस्थान के लिए 5 नई बसों का उद्घाटन कर उन्हें औपचारिक रूप से समर्पित किया गया, जिससे विद्यार्थियों को बेहतर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई, वहीं संस्थान का कुलगीत पूरे वातावरण को गौरवपूर्ण बना गया। संस्थान के अध्यक्ष डॉ.मनोज कुमार (सेवानिवृत्त आईएएस) ने अपने संबोधन में सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए संस्थान के चेयरमैन रवि सिंघानिया का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रवि सिंघानिया संस्थान को आगे बढ़ाने में निरंतर प्रयासरत हैं तथा शेखावाटी क्षेत्र से जुड़ाव बढ़ाने के लिए हरसंभव पहल कर रहे हैं।
प्रो. (डॉ.) यतीश अग्रवाल ने स्व.श्री डीसी सिंघानिया को स्मरण करते हुए कहा कि वे कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे, बल्कि अपने समय से आगे की सोच रखने वाले एक दूरदर्शी व्यक्तित्व थे। डॉ.दिलीप मोदी ने इस कार्यक्रम को इतिहास की पुनरावृत्ति बताते हुए कहा कि जीवन में सफलता के शिखर पर होने के बावजूद स्व. श्री डीसी सिंघानिया अपनी मातृभूमि की ओर लौटे और एक बंजर भूमि पर इतने बड़े शिक्षा संस्थान की स्थापना की। आज उनके पुत्र रवि सिंघानिया अपनी टीम के साथ उनकी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कामना की कि यह शिक्षा रूपी वटवृक्ष निरंतर फलता-फूलता रहे।
डॉ.महासिंह राव ने अपने संबोधन में इस समारोह में शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि सिंघानिया संस्थान एक ऐसा शिक्षा का मंदिर है, जहां शिक्षा के साथ-साथ खेल भी समान रूप से विकसित हो रहे हैं। उन्होंने संस्थान में खेलों के विकास हेतु हर संभव सहयोग देने की बात कही। मुख्य अतिथि हरि खेमका ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह कार्यक्रम विरासत का उत्सव है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि रवि सिंघानिया अपने पिता की विरासत के सच्चे संवाहक हैं और स्व. डीसी सिंघानिया के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहे हैं। चेयरमैन रवि सिंघानिया ने इसे अपने जीवन का एक भावनात्मक क्षण बताते हुए कहा कि उन्हें अपने पिता से यह सीख मिली कि केवल अपने लिए नहीं, बल्कि दूसरों के लिए भी कार्य करना चाहिए। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस अवसर पर उनके व्यावसायिक सहयोगी एवं परिवारजन उपस्थित रहे, साथ ही उन्होंने संस्थान के भविष्य के लिए तीन प्रमुख दृष्टिकोण शिक्षा, खेल एवं स्वास्थ्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रबंधक उप कुलपति (पीवीसी) डॉ.पवन त्रिपाठी द्वारा किया गया। इस अवसर पर अखिल भारतीय विश्वविद्यालय प्रतियोगिता में पदक विजेता विद्यार्थियों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। साथ ही प्रसिद्ध मूर्तिकार मातूराम को भी सम्मानित किया गया, जिनके कर कमलों द्वारा इस प्रतिमा का निर्माण किया गया। कार्यक्रम में संस्थान के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समारोह को जीवंत एवं यादगार बना दिया। इस अवसर पर आसपास के शेखावाटी क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, संस्थान के शिक्षण एवं गैर-शिक्षण स्टाफ, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं तथा मीडिया के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। अंत में सभी अतिथियों के साथ समूह फोटो और राष्ट्रीय गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन स्व.श्री डीसी सिंघानिया को श्रद्धांजलि अर्पित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर रहा, जिनकी प्रेरणा आज भी शिक्षा जगत को नई दिशा प्रदान कर रही है।