झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): देश की समृद्धि, खुशहाली और नारी शक्ति के उत्थान की कामना के साथ भारत सरकार की केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने झुंझुनूं प्रवास के दौरान प्रसिद्ध श्री रानी सती जी मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल में डूबा नजर आया और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला।
*भव्य स्वागत से गूंजा मंदिर परिसर: वरिष्ठ भाजपा नेता महेश बसावतिया ने किया सम्मान, देशभर से पहुंचे श्रद्धालु बने साक्षी*
मंदिर परिसर में केंद्रीय मंत्री का जोरदार स्वागत किया गया। महेश बसावतिया ने शॉल एवं दुपट्टा ओढ़ाकर मंत्री का अभिनंदन किया और उन्हें रानी सती दादी का प्रतीक चिह्न भेंट किया। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु भी मौजूद रहे, जिनमें प्रमुख रूप से गोपाल नारसरिया, नवल दारूका सहित अग्रवाल समाज के पदाधिकारी, मंदिर प्रशासनिक अधिकारी एचसी रोहिल्ला, सहायक अधिकारी विपुल छक्कड़, व्यवस्थापक लक्ष्मीकांत शर्मा, डॉ.डीएन तुलस्यान और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक व कार्यकर्ता शामिल रहे।
*नारी शक्ति पर केंद्रित संदेश*
“भारतीय संस्कृति में नारी का सर्वोच्च स्थान”—केंद्रीय मंत्री
मीडिया से बातचीत में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने स्पष्ट किया कि भारत की संस्कृति में नारी को सदैव पूजनीय स्थान प्राप्त है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय महिलाओं को देश के विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए कई प्रभावी योजनाओं पर काम कर रहा है।
*आंगनबाड़ी सुदृढ़ीकरण पर जोर: ग्रामीण विकास की मजबूत कड़ी बनेंगे आंगनबाड़ी केंद्र*
मंत्री ने आंगनबाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण और विस्तार की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये केंद्र न केवल बच्चों के पोषण और शिक्षा का आधार हैं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
*आस्था, विकास और संकल्प का संगम*
झुंझुनूं में केंद्रीय मंत्री का यह दौरा आस्था और विकास के समन्वय का प्रतीक बनकर उभरा। रानी सती धाम में की गई पूजा-अर्चना ने जहां आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार किया, वहीं उनके संदेश ने समाज में नारी सम्मान और सशक्तिकरण की दिशा में नई प्रेरणा दी। यह दौरा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि महिला सशक्तिकरण और समग्र विकास के संकल्प को भी मजबूती देने वाला साबित हुआ।