भागवत पुराण मानव से मानवता का सुगम पथ: संत अभय दास महाराज

AYUSH ANTIMA
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रानीवाड़ा/जालौर (मदन माहेश्वरी): धानोल स्थित गुरु दत्तात्रेय गो सेवाश्रम परिसर में वेदलक्षणा गौ नंदी कृपा महोत्सव के अंतर्गत आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का गुरुवार को भक्ति और उल्लास के साथ समापन हुआ। गो लोकवासी श्रीमती लवगा देवी धर्मपत्नी मोनाजी की पुण्य स्मृति में गोभक्त एवं गोव्रती परिवार—श्रीमती डाईदेवी धर्मपत्नी करना जी, सुपुत्र मोना जी पुरोहित परिवार, धानोल के तत्वावधान में आयोजित इस सात दिवसीय कथा में अंतिम दिन युवाचार्य संत अभयदास महाराज ने सुदामा चरित्र एवं परीक्षित मोक्ष का भावपूर्ण वर्णन किया। संत अभयदास महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि भागवत पुराण मानव को मानवता की ओर ले जाने वाला सरल, सुलभ और प्रेरणादायक मार्ग है, जो व्यक्ति को चिंता से चिंतन, जड़ता से ज्ञान और सीमित दृष्टिकोण से व्यापक सोच की ओर अग्रसर करता है। उन्होंने सुदामा प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि सुदामा वास्तव में गरीब नहीं थे, क्योंकि उनके पास संतोष रूपी सबसे बड़ा धन था। जब जीवन में संतोष आ जाता है तो अन्य सभी भौतिक संपत्तियां तुच्छ प्रतीत होती हैं। उन्होंने बताया कि सुदामा ने कभी किसी से याचना नहीं की और जो सहज रूप से प्राप्त हुआ, उसे स्वीकार किया। जब वे द्वारिका पहुंचे, तो भगवान श्रीकृष्ण ने स्नेहपूर्वक उनका स्वागत कर उनकी पोटली के चावल के माध्यम से उनका जीवन समृद्ध कर दिया।
संत ने यह भी कहा कि संतों का अपमान कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि उसका परिणाम अत्यंत गंभीर होता है। यदुवंश के उदाहरण से उन्होंने बताया कि ऋषियों के श्राप के कारण ही उसका अंत हुआ, साथ ही उद्धव-कृष्ण संवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि एक मन में एक साथ जगत और परमात्मा दोनों नहीं रह सकते, इसलिए व्यक्ति को सही मार्ग का चयन करना आवश्यक है। भागवत के समापन प्रसंग में शुकदेव और परीक्षित संवाद का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि मृत्यु का बोध ही जीवन के ज्ञान की शुरुआत है और आत्मा की अविनाशी प्रकृति को समझ लेना ही भागवत का सार है। अंत में संत अभयदास महाराज ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि कथा सुनना तभी सार्थक है, जब उसे जीवन में उतारा जाए। उन्होंने नशा एवं अन्य कुरीतियों से दूर रहने का आह्वान करते हुए कहा कि यदि श्रोता अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाते हैं, तो यही कथा की सच्ची सफलता होगी। कथा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव से भागवत महापुराण का रसपान किया। भीषण गर्मी को देखते हुए पंडाल में पंखे एवं कूलर की समुचित व्यवस्था की गई थी। साथ ही दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बस एवं अन्य यातायात साधनों की भी व्यवस्था की गई, जिससे आयोजन में निरंतर जनसहभागिता बनी रही।

*सम्मानित अतिथिगण*
इस अवसर पर प्रवीण सिंह चौहान (अध्यक्ष कामधेनु गौशाला, नाथद्वारा), विक्रम सिंह देवड़ा (अध्यक्ष युवा शक्ति फाउंडेशन पाथावाड़ा), संजय जोशी (श्री धारम्बा ज्योतिष कार्यालय, मंडार), उत्तम रावल (अध्यक्ष श्री राणेश्वर गोशाला, रानीवाड़ा खुर्द), चोपाजी ऊकाजी भोड, निलेश भाई सोनी, पुरेश भाई पटेल (रिपोर्टर), गंगेश्वर रेस्क्यू टीम धानोल के सदस्य, गो सेवाश्रम के ग्वाले एवं क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर श्रद्धालुओं ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए आयोजकों का आभार जताया।

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