निवाई (लालचंद माली): उप जिला अस्पताल की आशा सहयोगिनियों ने पदस्थापन व कार्य प्रणाली में किए गए बदलावों को लेकर आपत्ति जताते हुए मिशन निदेशक, विशिष्ट शासन सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं जयपुर को शिकायत पत्र भेजा है। आशा सहयोगिनियों ने बताया कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी टोंक डॉ.शैलेंद्र चौधरी द्वारा नियमों के विरुद्ध व द्वेषतापूर्ण तरीके से 25 में से 8 आशाओं को उप जिला अस्पताल से हटाकर शहरी जनता क्लीनिकों के अधीन कर दिया है। 28 मार्च 2025 को आयोजित एक बैठक में डॉ.शैलेंद्र चौधरी ने कथित रूप से जनता क्लीनिक के कार्मिकों के पास काम नहीं होने का हवाला देकर इन आशाओं को वहां बांटने के निर्देश दिए थे। स्थानांतरण के कारण आशा सहयोगिनियों के सामने कई तकनीकी व व्यावहारिक समस्याएं हो गई हैं। उन्होंने प्रमुख चिकित्सा अधिकारी द्वारा खण्ड मुख्य चिकित्सा अधिकारी को लिखेे पत्र में बताया कि पीसीटीएस एवं आशा सॉफ्ट पोर्टल पर केवल 17 आशाओं के नाम हैं, जिससे जनता क्लीनिक में भेजी गई 8 आशाओं के मानदेय भुगतान व ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के कार्यों में बाधाएं आ रही है। आशाओं ने बताया कि जनता क्लीनिकों में कंप्यूटर और ऑपरेटर जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। वहां प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से लगे अस्थाई कार्मिकों के कारण उनका कार्य और भुगतान प्रभावित होगा। आशा सहयोगिनी ललिता शर्मा, रेखा शर्मा, सुमन ब्रह्मभट्ट, मंगली देवी, शशि पारीक, सुनीता मीणा, मंजू सैनी व अंजू टेलर ने इसे विभाग की इक तरफा कार्यवाही व भेदभाव बताया है। उन्होंने बताया कि राज्य स्तर से ऐसा कोई आदेश नहीं है और टोंक जिले के अन्य किसी ब्लॉक में इस तरह की व्यवस्था नहीं की गई है। आशाओं ने मांग की है कि उन्हें वापस पूर्व की भांति उप जिला अस्पताल के अधीन ही रखा जाए, जिससे उन्हें मिल रही राहत जारी रहे और उनके कार्यों की मॉनिटरिंग सुचारू रूप से हो सके। उक्त समस्या को लेकर आशाओं ने चिकित्सा मंत्री, मुख्य सचिव व जिला कलेक्टर को भी कार्यवाही हेतु शिकायत पत्र भेजा।
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