निजी शिक्षण और कोचिंग संस्थानों द्वारा मनमानी फीस, भ्रामक विज्ञापन और बच्चों के मानसिक दबाव के मामलों को अकसर लूट की संज्ञा दी जा सकती है। इस समस्या को लेकर माननीय न्याय पालिका ने कई सख्त कदम उठाए हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम ने भ्रामक विज्ञापनों व अनुचित व्यापार प्रथाओं को लेकर इन पर नकेल कसने का काम किया है। संस्थानों के बंद होने पर छात्रों को फीस न लोटाने के मामले भी प्रकाश में आते रहे हैं। राजस्थान में सरकार ने राजस्थान कोचिंग सेंटर्स (नियमन और विनिमयन) विधेयक 2025 जरूर पेश किया लेकिन इसके क्रियान्वयन में देरी चिंता का विषय है। इस विधेयक के अनुसार कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य होगा और 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का प्रवेश प्रतिबंधित किया जा सकता है। यह संस्थान टापर छात्रों की खरीद फरोख्त कर अपने संस्थान के नाम से भ्रामक विज्ञापन देकर बच्चों की भावनाओं से खिलवाड़ करते हैं। यह संस्थान द्वारा बिना क्लास अटेंड किए बोर्ड की परीक्षा दिलाने के अवैध खेद में लिप्त है। राजस्थान सरकार ने जो बिल पेश किया, उसको सिलेक्ट कमेटी को भेज दिया गया। शायद यह शिक्षा माफिया के दबाव के कारण कानून बनने में देरी हो रही है। अब यदि गृह जिले झुनझूनू की बात करें तो निजी स्कूल अपने यहां से पेन, पेन्सिल, कापी, किताब, जूते, मोजे व ड्रेस का व्यापार करते है, बस गुणवत्ता की शिक्षा के लिए ट्यूशन की और धकेल देते है। जिले में फैले कोचिंग सेन्टरों के मकड़जाल ने बच्चों को इतना भ्रमित कर दिया कि वह निर्णय नहीं ले पा रहे कि आखिर उनको क्या करना है। यह कोचिंग संस्थान व निजी स्कूल बच्चों के गले में फूल-मालाएं डालकर उनकी पूरे शहर में झाकी निकालते हैं व अपने हिसाब से मैरिट बनाकर बड़े बडे होर्डिंग शहर के चौराहो की शोभा बढ़ाते हैं। सुरक्षा मानकों की बात करें तो शायद ही कोई कोचिंग संस्थान होगा, जो सुरक्षा मानको को पूरा करता हो। सुरक्षा मानकों के दृष्टिगत स्थानीय प्रशासन शायद गुजरात जैसे हादसे का इंतजार कर रहा है क्योंकि प्रशासन की नाक के नीचे यह संस्थान टावर नुमा बिल्डिंग में चल रहे हैं। सुरक्षा मानकों में अग्नि सुरक्षा, संचालनात्मक मजबूती, सीसीटीवी, प्राथमिक चिकित्सा व स्वास्थ्य सहायता जैसे कड़े सुरक्षा मानक आवश्यक है। छात्रों में बैठने की व्यवस्था मे एक वर्ग मीटर स्थान अनिवार्य है। महिला सुरक्षा व स्वास्थ्य को लेकर अलग शौचालय, सीसीटीवी कैमरे, फर्स्ट एड किट होना अनिवार्य है। उचित रोशनी, हवा का संचार व पीने के शुद्ध पानी की व्यवस्था सुरक्षा मानकों के मापदंड है लेकिन उपरोक्त सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाते अनेक संस्थान जिले मे प्रशासन की नाक के नीचे संचालित है व प्रशासन या तो इनसे बेखबर है या राजनीतिक रसूखदार होने की वजह से कार्यवाही न करना उनका डर या मजबूरी है।
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