नारी सशक्तिकरण की मिसाल संतोष अहलावत

AYUSH ANTIMA
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झुन्झुनू लोकसभा क्षेत्र में संतोष अहलावत के नाम से शायद ही कोई अनभिज्ञ होगा। अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत बुहाना पंचायत समिति प्रधान व 2005 में जिला परिषद सदस्य चुनी गई। वर्ष 2013 में सूरजगढ़ विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुई। संतोष अहलावत 2014 से 2019 तक झुंझुनूं लोकसभा के सांसद के रूप में भाजपा की टिकट पर विजयी रही। उनकी लोकप्रियता व जनता से उनके जुड़ाव का नतीजा था कि झुन्झुनू सदैव कांग्रेस का अजेय गढ़ रहा है लेकिन उन्होंने जिले के कद्दावर कांग्रेसी नेता स्वर्गीय शीशराम ओला की राजनीतिक विरासत संभालने वाली उनकी पुत्रवधू डॉ.राजबाला ओला को करीब तीन लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। बालिका शिक्षा व महिला सशक्तिकरण की पक्षधर संतोष अहलावत ने इस क्षेत्र मे ऐतिहासिक काम किए। देश की प्रमुख मैगजीन फेम इंडिया ने देश भर के 545 सांसदों की कार्यशाला, सदन में उनकी सहभागिता, आचरण शक्ति एवं योग्यता को लेकर 25 टाप सांसदों में संतोष अहलावत को चुना। उनका यह चुनाव जनता से जुडाव, लोकप्रियता, छवि, कार्यशैली, सामाजिक सहभागिता, सदन में उपस्थिति व संसदीय बहस मे झुन्झुनू लोकसभा क्षेत्र के जनहित के मुद्दे जोरदार तरीके उठाने को लेकर किया गया। इस सर्वे के तहत संतोष अहलावत को शक्ति श्रेणी के तहत श्रेष्ठ सांसद माना गया। उनके अनुभवों व कार्यक्षमता को देखते हुए उनको मानव संसाधन विकास संबंधी स्थायी समिति, शहरी विकास, आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति व अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के कल्याण संबंधी समिति का हिस्सा बनाया गया। 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने उनका टिकट काट दिया। अमूमन टिकट कटने के बाद नेता सत्ता की चाहत मे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावो में उतर जाते हैं लेकिन संतोष अहलावत ने शीर्ष नेतृत्व के निर्णय को सर्वोपरि मानते हुए भाजपा में ही निष्ठा बनाए रखी क्योंकि झुंझुनूं जिला नेताओ के लिए आया राम गया राम की राजनीति के लिए विख्यात रहा है। राजस्थान विधानसभा चुनावों में सूरजगढ विधानसभा से उनको भाजपा शीर्ष नेतृत्व ने उनकी क्षमता पर विश्वास व्यक्त करते हुए उम्मीदवार बनाया लेकिन संतोष अहलावत को इन चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। वैसे हार जीत चुनावी परिणाम में सिक्के के दो पहलू होते हैं लेकिन पराजय के बावजूद संतोष अहलावत ने जमीनी स्तर पर अपने क्षेत्र में आमजन से जुडाव के साथ ही भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार द्वारा अपने विधानसभा क्षेत्र सूरजगढ में अनेक विकास के कामों को अंजाम दिया, जिसमें मुख्य सूरजगढ को कुंभाराम लिफ्ट परियोजना का पानी मिलना है। हालांकि विपक्षी कांग्रेस के विधायक इन कामों का श्रेय लेकर खुद को महिमा मंडित करते नजर आ रहे हैं। संतोष अहलावत पर प्रदेश नेतृत्व का भरोसा इसी बात का घौतक है कि उनको प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य के रूप में मनोनीत किया है। संगठनात्मक क्षेत्र मे यदि संतोष अहलावत का योगदान देखे तो संतोष अहलावत किसी गुटबाजी का हिस्सा नहीं रही और सभी कार्यकर्ताओं का सम्मान व उन पर विश्वास और उनको साथ लेकर चलने का वह मूलमंत्र है, जिसके कारण उनकी लोकप्रियता बरकरार है।

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