असमय बारिश से फसल खराबे पर आयोग का स्वतः संज्ञान: मुख्य सचिव को भेजा पत्र

AYUSH ANTIMA
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झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झुंझुनूं के अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने प्रदेश में हाल ही में हुई असमय वर्षा एवं ओलावृष्टि से फसलों को हुए नुकसान के मामलों में स्वतः संज्ञान लिया है। इस संबंध में उन्होंने राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव को पत्र भेजकर सभी जिलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश जिला कलक्टर को देकर उपभोक्ता संरक्षण करवाने के लिए त्वरित व सकारात्मक व्यक्तिगत सदप्रयास करने का आग्रह किया है। मील ने पत्र में उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के प्रावधानों के बावजूद कई स्थानों पर फसल नुकसान की सूचना, सर्वे एवं दावा निस्तारण की प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उपभोक्ता विवादों की स्थिति उत्पन्न हो रही है। जिससे न्याय व्यवस्था पर मुकदमों का भार आता है और पीड़ित किसानों को अनावश्यक रूप से कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते है। उन्होंने मुख्य सचिव से प्रदेश के सभी जिलों में राजस्व, कृषि विभाग एवं बीमा कंपनियों के संयुक्त समन्वय से तत्काल विशेष गिरदावरी एवं फसल क्षति सर्वे करवाने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। साथ प्रधानमंत्री फसल बीमा के प्रावधानों के अनुसार 72 घंटे के भीतर बीमा कंपनियों को फसल नुकसान की सूचना देने के नियम का ग्राम स्तर तक व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करने एवं पीड़ित किसानों के प्रार्थना पत्रों का संकलन करवाने पर जोर दिया है। पत्र में यह भी कहा गया है कि बीमा कंपनियों द्वारा प्राप्त सूचनाओं पर तुरंत व्यक्तिगत क्षति आकलन शुरू किया जाए तथा दावा निस्तारण की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाया जाए। जिला स्तर पर नोडल अधिकारी नियुक्त कर पूरे प्रकरण की मॉनिटरिंग करने और किसानों को मुआवजा मिलने तक निरंतर फॉलोअप रखने की भी आवश्यकता जताई गई है। मील ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जियो-टैग्ड फोटो, मोबाइल ऐप एवं अन्य डिजिटल माध्यमों के उपयोग को अनिवार्य करने की बात कही है। साथ ही फसल कटाई के बाद खेत में रखी फसलों के नुकसान को भी बीमा दायरे में लेकर प्राथमिकता से दावे निपटाने पर जोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि समयबद्ध कार्रवाई नहीं होती है तो इससे उपभोक्ता आयोगों पर अनावश्यक परिवादों का भार बढ़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और बीमा कंपनियों पर निर्धारित होने के संबंधित निर्देश जारी किए जाने को उचित व न्यायोचित बताते हुए राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव से इस संबंध में तत्काल प्रभाव से आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह किया है, ताकि किसानों को समय पर राहत मिल सके।

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