जयपुर (श्रीराम इंदौरिया): जयपुर परिवार सेवा ट्रस्ट के बैनर तले मानसरोवर स्थित वीटी रोड मेला ग्राउंड पर चल रही श्री शिव पुराण कथा के छठवें दिन बुधवार को पंडित प्रदीप मिश्रा सिहोर वालों की कथा सुनने के लिए देशभर से हजारों भक्त उमड़ पड़े। इस दौरान कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित हजारों आत्म तल्लीन श्रद्धालु कभी प्यासे काे पानी पिलाया नहीं ....शंभू चरण पड़े ....हम तो बाबा के भरोसे चलते है.... जैसे भजनों की स्वर लहरियों व झूमते नाचते आए। इस मौके पर ख्याति प्राप्त कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर भी कथा श्रवण करने पहुंचे। इस मौके पर आयोजन समिति के मुख्य व्यवस्थापक अखिलेश अत्री और मनोज पांडे ने ठाकुर का स्वागत किया। इस अवसर पर कथा सुनाते हुए पंडित प्रदीप मिश्रा सिहोर वाले ने कहा कि हर कंकर में शंकर है और प्रत्येक जीव में परमात्मा है। शिव की साधना करने वाला साधक इंसान से नहीं वों भगवान से कामना करता है।जीवन में तकलीफ आना आम बात है पर उस तकलीफ को लोगों को बताने की बजाय अगर आप भगवान शिव का बताओगे तो यकीन रखना तो वो दुख की घड़ी में आपके रिश्तेदार, मित्र या सहायक के रूप में आपकी मदद करने के लिए भगवान शिव आते है लेकिन वो मूल स्वरूप में नहीं आते है।
*रूद्राक्ष का बताया महत्व*
रूद्राक्ष का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि जिनके गले में भोले का प्रिय रूद्राक्ष होता है, उनकी रक्षा स्वयं भगवान आशुतोष व मां पार्वती करती है। जिंदगी मेंं आलोचनाओं से नहीं डरना चाहिए, साथ ही जिनका भगवान शिव में विश्वास है, उन्हें केवल भगवान शिव से मदद की कामना करनी चाहिए, इंसानों से नहीं। राष्ट्रधर्म का महत्व बताते हुए कहा कि जब देश पर कोई संकट या आंच आए तो सभी देशवासियों को जाति, धर्म व वर्ण से ऊपर ऊठकर एकजुटता के साथ देश के गौरव को बढ़ाने के लिए कार्य करना चाहिए।
*बेटियां ही नहीं बहुओं को भी पढ़ाओ*
महिला शिक्षा की उपयोगिता बताते हुए कहा कि बेटियां ही नहीं बहुओं को भी खूब पढ़ाना चाहिए। कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने भगवान औडरदानी की शमशान भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि शमसान वह स्थान है, जहां सबकी शान बराबर होती है। यहां राज, रंक, अमीरी-गरीबी में कोई भेद नहीं होता है, सभी बांस पर लाल ओैर सफेद कपड़ों में लिपटकर आते है, यहां सबकी शान बराबर होती है, उसे ही शमसान कहते हैं। इस अवसर पर शिवरात्रि उत्सव भी धूमधाम से मनाया गया।
*सनातनी दिखो, सनातनी बनो: देवकीनंदन*
इस अवसर ख्याति प्राप्त कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि जो ईश्वर, मां-बाप व देश इन तीन का सम्मान करता है, वही सच्चा सपूत है। हिंदु दिखो मत, हिंदु बनो, सनातनी दिखो, सनातनी बनो। सनातन धर्म का अर्थ है सब-कुछ छोड़ो, सत्य को तलाशो क्योंकि सत्य के प्रति मेरी चाहत, मेरी तड़प, मात्र वही तो सनातन है; बाकी किसी बात की परवाह मुझे करनी नहीं, मुझे सच्चाई चाहिए, मुझे रोशनी चाहिए, सिर्फ़ यही बात सनातन है, इसको सनातन धर्म कहते हैं। यह मेरे भाग्य है कि मैं शिवरात्रि की कथा सुनने आया हूं। जीवन में बड़ों का सम्मान हमेशा करो क्योंकि सम्मान देने से ही सम्मान मिलता है। इस मौके पर आयोजन समिति के मुख्य व्यवस्थापक अखिलेश अत्री और मनोज पांडे और उनकी टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि मुख्य व्यवस्थापक बधाई के पात्र है, जो इस तरह का आयोजन करवाया हैं। यह आयोजन हमारी पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी होगा। इस कथा के दौरान पत्रों का वाचन किया। इस दौरान मंच से देश के विभिन्न अन्य स्थानों से आए श्रद्धालुओं के लिखे पत्रों के अनुभवों को मंच के माध्यम से साझा करते हुए कथावाचक मिश्रा ने कहा कि कथा का नियमित श्रवण करने और एक लोटा जल चढ़ाने से किसी के जुड़वां बच्चे पैदा हो गए, किसी को असाध्य बीमारियों से छुटकारा मिल गया।
*आज कथा सुबह 8 बजे से 11 बजे तक होगी*
आयोजन समिति के मुख्य व्यवस्थापक अखिलेश अत्री और मनोज पांडे ने बताया कि कथा के अंतिम दिन कथा के समय में बदलाव करते हुए गुरुवार को कथा सुबह 8 बजे से सुबह 11 बजे तक होगी। कथा के समापन पर रक्षक सत्यनारायण-पुष्प लता बेरीवाल, मुख्य यजमान पुष्पलता-घनश्याम रावत, रेणु-राकेश रावत मानपुर वाले, कार्यक्रम संयोजक राजकुमारी-जुगल किशोर डेरेवाला, संतरा-प्रभु नारायण अग्रवाल, सह यजमान पूनम हर्ष व नरेन्द्र कुमार हर्ष सहित अन्य पदाधिकारियों ने आरती उतारी।