विचार मंच कोलकाता के राष्ट्रीय पुरस्कार घोषित

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर: सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली कोलकाता की संस्था विचार मंच द्वारा वर्ष 2026 के राष्ट्रीय पुरस्कारों एवं सम्मानों की घोषणा कर दी गई है। इस आशय की जानकारी देते हुए संस्थान के मंत्री प्रदीप पटवा ने बताया कि समग्र साहित्यिक अवदान के लिए अर्पित किया जाने वाला वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित “कन्हैया लाल सेठिया साहित्य सम्मान” इस वर्ष बीकानेर की वरिष्ठ साहित्यकार, समालोचक एवं साहित्यिक आयोजनों की कुशल संचालक मोनिका गौड़ को प्रदान किया जाएगा। विचार मंच प्रतिवर्ष विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित करता है। आयोजक संस्था के अध्यक्ष सरदारमल कांकरिया ने बताया कि एसपी के जैन फ्यूचररिस्टिक अकादमी, कोलकाता में रविवार, 15 मार्च को प्रख्यात उद्योगपति एवं समाजसेवी हरिप्रसाद बुधिया की अध्यक्षता और प्रमोद कुमार सराफ के मुख्य आतिथ्य में आयोज्य समारोह में श्रीमती गौड़ को एक लाख रुपये की नकद राशि एवं सम्मान-पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान कर समादृत किया जायेगा। संस्थान प्रतिनिधि किशोर ने जानकारी दी कि मोनिका गौड़ की हिंदी एवं राजस्थानी भाषा में 10 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं तथा वे विभिन्न साहित्यिक मंचों पर राजस्थानी भाषा का सशक्त प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। साहित्य सृजन, समालोचना और मंच संचालन के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उनकी प्रमुख कृतियों में ‘हथेली में चाँद’, ‘अंधारैै री उधारी अर रीसाणों चाँद’ शामिल हैं। उनकी रचनाओं का प्रसारण दूरदर्शन एवं आकाशवाणी से होता रहा है। गौड़ जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल तथा रेख्ता फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रमों में राजस्थानी कविता का प्रतिनिधित्व कर चुकी है।
राष्ट्रभाषा हिंदी प्रचार समिति के श्याम महर्षि ने इसे बीकानेर सहित समूचे राजस्थान के साहित्य जगत के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए बधाई दी। साहित्यकार रवि पुरोहित ने मोनिका गौड़ के सम्मान को राजस्थानी और हिंदी साहित्य की निरंतर साधना का सम्मान बताया। प्रखर पत्रकार और लेखक सुमित शर्मा ने संस्थान के चयन को क्षेत्रीय साहित्य को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। जगदीश शर्मा, ओमप्रकाश गौड़, डॉ.आत्माराम शर्मा, डॉ.शारदा कृष्ण एवं मनीषा आर्य सोनी ने भी प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे बीकानेर और राजस्थान की महत्वपूर्ण साहित्यिक उपलब्धि बताया।

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