आरजीएचएस स्कीम पर गहरा वित्तीय व प्रशासनिक संकट मंडरा रहा है, जिसके कारण करीब 1800 करोड़ रूपये के बकाया भुगतान की खबरें आ रही है। इस बकाया भुगतान के न होने के कारण निजी अस्पतालों ने कैशलैस सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी है। इस योजना में अनियमितता के चलते 34 निजी अस्पतालों व 431 फार्मा स्टोर वालों को इस सेवा से वंचित कर दिया था। प्रादेशिक दवा विक्रेता संघ का कहना है कि 25 मार्च से इस स्कीम के तहत कैशलेस दवाओं की सुविधाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा। यह कदम हजारों पेंशनर्स समेत सरकारी कर्मचारियों व उसके परिजनों के लिए एक बड़ा झटका है। इस योजना के सुचारू रूप है, संचालन के लिए प्रतिमाह करीब 375 करोड़ रूपये की आवश्यकता होती है। आरजीएचएस ओपीडी फार्मेसी के अन्तर्गत पिछले नौ महीने से भुगतान नहीं हो रहा है और न ही सरकार इसकी समय सीमा बता रही हैं। इसको लेकर बामनवास विधायक इंदिरा मीणा ने विधानसभा के चौथे सत्र में सवाल भी लगाया था लेकिन सरकार की तरफ से इसका कोई जबाब नहीं दिया गया। केमिस्ट संगठन ने आरोप लगाया है कि भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता की कमी के साथ मानिटरिंग कमजोर है व भुगतान फाईलो को विभिन्न स्तरों पर अटका के रखा जाता है। इसको लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजन लाल शर्मा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सरकारी कर्मचारियों की सैलरी से पैसे काटने पर भी उनका इलाज नहीं हो रहा है। विदित हो आरजीएचएस स्कीम सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना थी, जिसको गहलोत सरकार ने लागू किया था। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के सरकारी कर्मचारियों व पेंशनर्स और उनके आश्रितों को मुफ्त और कैशलेस इलाज देना था। मरीज के अस्पताल में भर्ती होने या ओपीडी के इलाज करवाने के लिए जेब से पैसे नहीं देने पड़ते थे। सरकार द्वारा लागू इस स्कीम में सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स व उनके आश्रितों को राहत की उम्मीद थी लेकिन वर्तमान हालात में यह योजना बोझ बनकर रह गई है, इसकी वजह से उनको पैसा देकर दवाईयां खरीदनी पड़ रही है। प्रदेश मे निजी अस्पतालों में इस सुविधा के चलते भ्रष्टाचार की खबरें आती रही है कि फर्जी तरीके से भुगतान उठाया जा रहा है। इसके चलते ईमानदारी से ईलाज करने वाले निजी अस्पतालो का भुगतान भी रोक दिया गया। इस योजना में जो अनियमितता है, उसको लेकर सरकार को गंभीर कदम उठाने होंगे क्योंकि कर्मचारियों की तनख्वाह से तो पैसे हर महीने काटे जा रहे हैं व सरकार की तरफ से भुगतान न होने के कारण आरजीएचएस स्कीम उनके जी का जंजाल बन गई है।
3/related/default