झुंझुनूं में आज सजेगी गणगौर की शाही सवारी: लोक संस्कृति के रंगों में रंगेगी शेखावाटी की धरा

AYUSH ANTIMA
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झुंझुनूं (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): शेखावाटी की माटी में रची-बसी लोक आस्था और उत्सवों की अटूट परंपरा 'गणगौर' इस बार झुंझुनूं में ऐतिहासिक होने जा रही है। श्री गोपाल गौशाला के तत्वाधान में कल, 21 मार्च को निकलने वाली गणगौर माता की शाही सवारी न केवल धार्मिक श्रद्धा का केंद्र होगी, बल्कि राजस्थान की लुप्त होती लोक कलाओं का एक जीवंत मंच भी बनेगी।

*भक्ति और वैभव का रूट चार्ट*

गौशाला अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया और मंत्री प्रदीप पटोदिया ने बताया कि शाही सवारी का सफर दोपहर से ढलती शाम तक शहर के मुख्य मार्गों को भक्ति और उल्लास से सराबोर कर देगा। 

*प्रस्थान: दोपहर 3:30 बजे (श्री गोपाल गौशाला से)*

* प्रमुख मार्ग: झुंझुनूं एकेडमी, लावरेश्वर महादेव मंदिर, श्याम मंदिर, चूना का चौक और राणी सती रोड।

* महाआरती: शाम 5:30 बजे छावनी बाजार में आचार्य दीनदयाल शुक्ला के सानिध्य में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विशेष पूजा-अर्चना होगी।
* समापन: जोशियों का गट्टा, गुदड़ी बाजार और कपड़ा बाजार होते हुए सवारी समस तालाब पहुंचेगी, जहाँ अंतिम पूजा के बाद विसर्जन की रस्म होगी।

* आकर्षण का केंद्र: जयपुर के कलाकारों का दिखेगा जलवा: कार्यक्रम संयोजक नारायण प्रसाद जालान एवं डॉ.डीएन तुलस्यान के अनुसार, इस बार सवारी को 'शाही' स्वरूप देने के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं।

* घूमर और कालबेलिया: 'हरजी राणा एंड पार्टी' की नृत्यांगनाएं मार्ग में विभिन्न स्थानों पर प्रस्तुतियां देंगी।

* कच्छी घोड़ी नृत्य: वीरता का प्रतीक कच्छी घोड़ी नृत्य इस बार मुख्य आकर्षण रहेगा।

* शाही लवाजमा: सजे-धजे ऊंट, घोड़े, पारंपरिक बैंड-बाजे और राजस्थानी वेशभूषा में 'छत्तर' लिए कलाकारों का दल राजा-महाराजाओं के दौर की भव्यता को जीवंत करेगा।
* विशेष व्यवस्था: श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए श्री गल्ला व्यापार संघ की ओर से छावनी बाजार में शीतल पेय और विश्राम की पुख्ता व्यवस्था की गई है।

* सांस्कृतिक महत्व: "तीज त्यौहारा बावड़ी, ले डूबी गणगौर", राजस्थानी संस्कृति में गणगौर का पर्व त्यौहारों के चक्र का समापन माना जाता है। 16 दिवसीय यह अनुष्ठान कुंवारी कन्याओं के लिए अच्छे वर की कामना और विवाहित महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का प्रतीक है। मान्यता है कि गणगौर की विदाई के साथ ही त्यौहारों पर कुछ समय के लिए विराम लग जाता है, जो पुनः श्रावण की 'तीज' के साथ लौटते हैं।

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