झुंझुनूं/गुरुग्राम (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): शेखावाटी की हृदय स्थली झुंझुनूं अब केवल अपनी हवेलियों और वीरता के लिए ही नहीं, बल्कि भक्ति और स्थापत्य कला के एक नए केंद्र के रूप में पहचानी जाएगी। लगभग 125 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक श्री गोपाल गौशाला द्वारा संचालित बगड रोड स्थित नंदीशाला में 111 फीट ऊंची भगवान शिव की दिव्य प्रतिमा नंदी महाराज के साथ स्थापित की जाएगी। झुंझुनूं नंदीशाला में 111 फीट ऊंची प्रतिमा लगने के बाद यह स्थान राजस्थान के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में शुमार हो जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए गौशाला के पदाधिकारियों ने गुरुवार को मानेसर (गुड़गांव) स्थित मातुराम आर्ट गैलरी का दौरा किया और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मूर्तिकार नरेश कुमावत से विस्तृत चर्चा की।
श्री गोपाल गौशाला के अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया, मंत्री प्रदीप पाटोदिया एवं डॉ.डीएन तुलस्यान ने नरेश कुमावत के अत्याधुनिक स्टूडियो का अवलोकन किया। बैठक के दौरान प्रतिमा के स्वरूप, निर्माण सामग्री और सुरक्षा मानकों पर चर्चा हुई। गौशाला पदाधिकारियों ने इस अवसर पर पिलानी निवासी और मातुराम वर्मा के सुपुत्र नरेश कुमावत का साफा, दुपट्टा और गौ माता का प्रतीक चिन्ह भेंटकर अभिनंदन किया। अध्यक्ष प्रमोद खंडेलिया ने कहा, "हमारा उद्देश्य नंदीशाला को एक रमणीक और आध्यात्मिक स्थल बनाना है ताकि यहाँ लोगों का आवागमन बढ़े और समाज में गौ-सेवा के प्रति समर्पण की भावना का और अधिक विकास हो सके।"
झुंझुनूं के पिलानी में जन्मे नरेश कुमावत आज मूर्तिकला की दुनिया में भारत के 'सांस्कृतिक राजदूत' माने जाते हैं। उनके कार्यों की गूँज भारत से लेकर जेनेवा, मॉरीशस, दक्षिण अफ्रीका और जापान शहीद अनेकों देशो तक सुनाई देती है।
*संसद भवन की पहचान:*
भारत के नए संसद भवन के अंदर 75 फीट लंबा और 9 फीट ऊंचा 'समुद्र मंथन' भित्तिचित्र नरेश कुमावत की ही कृति है, जिसे बनाने में 235 दिव्य आकृतियों और 40 कारीगरों की मेहनत लगी थी। नरेश कुमावत ने अपनी कला अपने दादा स्वर्गीय हनुमान प्रसाद और पिता मातु राम वर्मा से विरासत में सीखी है। आज वे 'मातु राम आर्ट सेंटर्स' (MRAC) के माध्यम से भारतीय कला को वैश्विक मानकों पर स्थापित कर रहे हैं। इसी के साथ नरेश कुमार की सुपुत्री राशि कुमावत भी इसी कला को जीवंत रखे हुए हैं। अपनी शिक्षा के साथ साथ इस कार्य में भी उन्होंने विशिष्ट उपलब्धि हासिल की है। नरेश कुमावत हरियाणा में एक 'ग्लोबल क्राफ्ट एंड स्कल्प्टर एक्सीलेंस सेंटर' भी चला रहे हैं, जहाँ नई पीढ़ी को इस महान कला का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।