चिड़ावा (राजेन्द्र शर्मा झेरलीवाला): विप्र इंडिया वेलफेयर फाउंडेशन ने देशभर के शिक्षाविदों, छात्रों, अभिभावकों एवं जागरूक नागरिकों की गंभीर चिंता और असंतोष को ज्ञापन के माध्यम से समक्ष प्रस्तुत किया। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा प्रस्तावित नए नियमों/विधेयक को लेकर देशभर में अनेक प्रश्न और आशंकाएँ उत्पन्न हुई हैं। यह प्रस्ताव उच्च शिक्षा व्यवस्था में जातिगत विभाजन को बढ़ावा देने वाला, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को प्रभावित करने वाला तथा संविधान में निहित समानता के सिद्धांत के विपरीत प्रतीत होता है। देश में पहले से ही भारतीय न्याय संहिता, दंड प्रक्रिया संहिता, एंटी रैगिंग नियम तथा SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम जैसे कठोर कानून प्रभावी हैं। ऐसे में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए अलग से नए जातिगत नियम लाने की आवश्यकता पर गंभीर पुनर्विचार आवश्यक है। जातिगत भेदभाव निःसंदेह देश के लिए घातक है और दोषियों के विरुद्ध कठोर दंड आवश्यक है, परंतु साथ ही निर्दोषों की सुरक्षा और निष्पक्ष जाँच की गारंटी भी उतनी ही आवश्यक है। ज्ञापन में विप्र इंडिया वेलफेयर फाउंडेशन ने मांग की है कि प्रस्तावित UGC नियमों/विधेयक को वर्तमान स्वरूप में लागू न किया जाए। इस विषय पर शिक्षाविदों, छात्रों, सामाजिक संगठनों एवं विधि विशेषज्ञों से व्यापक संवाद किया जाए। किसी भी जाँच समिति में सभी वर्गों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए। कानून में पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा दुरुपयोग रोकने के स्पष्ट प्रावधान जोड़े जाएँ। इस अवसर पर भाजपा पूर्व जिला महामंत्री अमर सिंह तँवर, समाज चिंतक महेश शर्मा आजाद, मुलचंद् नरहड़िया, सुभाष व्यास, एडवोकेट लोकेश शर्मा, पंडित सुनील शर्मा, मदन मोहन शर्मा सेवानिवृत विधुत विभाग, विप्र इंडिया के अध्यक्ष अनिल शर्मा "भारती" मौजूद रहे।
*विप्र इंडिया संगठन के बैनर तले सर्वसमाज ने उपखंड अधिकारी को राष्टृपति के नाम प्रस्तावित UGC विधेयक में परिवर्तन के विरोध में सौपा ज्ञापन
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February 09, 2026
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