मातृभाषा में विचारों की अभिव्यक्ति सर्वाधिक सहज, स्पष्ट व प्रभावशाली

AYUSH ANTIMA
By -
0


बीकानेर (प्रमोद व्यास): विश्व मातृभाषा दिवस की पूर्व संध्या पर राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी तथा राजकीय सार्वजनिक मंडल पुस्तकालय के संयुक्त तत्त्वावधान में शुक्रवार को पुस्तकालय सभागार में ‘मायड़ भासा री महिमा‘ विषयक व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर उपस्थित युवाओं को मायड़ भाषा का महत्त्व बताते हुए राजस्थानी लिखने-बोलने हेतु प्रेरित-प्रोत्साहित किया गया। मुख्य वक्ता के रूप में नेहरू शारदा पीठ महाविद्यालय के राजस्थानी विभागाध्यक्ष डॉ.गौरीशंकर प्रजापत ने कहा कि मातृभाषा में विचारों की अभिव्यक्ति सर्वाधिक सहज, स्पष्ट व प्रभावशाली होती है। नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उनकी मातृभाषा या स्थानीय भाषा में देने से वे बेहतर रूप से समझ सकेंगे तथा सीखने में उनकी रुचि बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि राजस्थानी का साहित्य भंडार अत्यंत समृद्ध है व इसका शब्दकोश अत्यंत विशाल है। राजस्थानी को मान्यता मिलने से प्रदेश को युवाओं को रोजगार के नये अवसर मिलेंगे। उन्होंने उपस्थित युवाओं से राजस्थानी में साहित्य-सृजन करने का आह्वान किया। अकादमी सचिव शरद केवलिया ने कहा कि मायड़ भाषा मानसिक विकास व व्यक्तित्व को आकार देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मातृभाषा व्यक्ति की सांस्कृतिक-सामाजिक पहचान की सूचक है, गौरव का प्रतीक है व यह हमें एकसूत्र में बांधती है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए पुस्तकालयाध्यक्ष विमल शर्मा ने कहा कि वर्ष 2000 से संपूर्ण विश्व में विश्व मातृभाषा दिवस मनाया जा रहा है। भारत की 22 भाषाएं संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल हैं।पुस्तकालय परामर्शदाता रश्मि लाटा ने आभार व्यक्त किया। इस दौरान केसरी सिंह भाटी, भंवरलाल, मोईनुदीन, रामदेव स्वामी, रोहित कुमार स्वामी, रामभरोस सहित बड़ी संख्या में युवा उपस्थित थे।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!