सफेदपोशों के संरक्षण बिना भ्रष्टाचार संभव नहीं

AYUSH ANTIMA
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जल मानव जीवन की मूलभूत सुविधाओं में से एक है। जल ही जीवन है व जल की सेवा सनातन धर्म में सबसे उपयुक्त भी मानी गई है। इसी कारण शेखावाटी के भामाशाह बावड़ी, कुओं व प्याऊ का निर्माण कर इस पवित्र काम मे आगे रहते थे लेकिन दुर्भाग्य इस देश का कि अफसरशाही व सफेदपोशों की मिलीभगत ने पानी जैसी साधारण पर मानव जीवन के लिए उपयोगी चीज को भी नहीं छोड़ा। राजस्थान में जल जीवन मिशन में करीब 960 करोड़ के घोटाले को लेकर एसीबी को फरार पूर्व आईएएस सुबोध अग्रवाल की सरगर्मी से तलाश जारी है। उसकी फरारी को लेकर लुक आउट नोटिस जारी कर दिया है, जिससे वह नीरव मोदी व विजय माल्या की तरह विदेश न भाग जाए। इस मामले में 9 आऱोपिय़ो को अदालत ने तीन दिन के रिमांड पर भेज दिया है। विदित हो 2022-23 में करोड़ों रूपये के इस घोटाले में तत्कालीन कांग्रेस सरकार में जलदाय मंत्री महेश जोशी समेत दर्जन भर अधिकारी व ठेकेदार पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सूत्रों की मानें तो सुबोध अग्रवाल की ओर से माननीय हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है कि जिसमें एसीबी द्वारा दायर एफआईआर को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में उन्होंने जल जीवन मिशन में जिन स्वीकृतियों को लेकर विवाद है, उनमें से ज्यादातर स्वीकृतियां तब जारी की गई थी, जब जलदाय विभाग की कमान अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधांश पंत के पास थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वे जब जलदाय विभाग के प्रमुख बने तब उन्होंने विवादित दोनो फर्मों के टेंडर निरस्त कर उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया था। अब अग्रवाल के आरोपों में कितना दम है, यह तो माननीय कोर्ट ही निर्धारित करेगा लेकिन सुधांश पंत का नाम आने से मामले में नया मोड़ आ गया है। राजस्थान में दो वर्ष पहले जब भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी थी तब सुधांश पंत को मुख्य सचिव बनाया गया था। सुधांश पंत को लेकर आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) ने अपने 11 नवम्बर के अंक मे सुपर सीएम की विदाई नामक लेख में सुधांश पंत के बारे में लिखा था कि किस तरह वे सुपर सीएम की तरह काम कर रहे थे। विधायको का जमावड़ा मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के कमरे के आगे से ज्यादा सुधांशु पंत के आफिस के आगे देखा जाता था। विधायक दबी जुबान में सरकार पर अफसरशाही हावी होने के आरोप बार बार लगाते रहते थे। यही कारण था कि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने दिल्ली दरबार में गुहार लगाकर उनकी विदाई करवाई, इसी से उनकी ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। अब अग्रवाल के आरोपों पर माननीय कोर्ट क्या निर्णय लेगा यह तो आने वाला समय ही निर्धारित करेगा।

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