सेवा, संस्कार और संवेदना की प्रतिमूर्ति को भावभीनी श्रद्धांजलि

AYUSH ANTIMA
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बीकानेर (विजय कपूर): माहेश्वरी समाज के अत्यंत सम्मानित, सेवा-निष्ठ एवं प्रेरणास्रोत व्यक्तित्व स्वर्गीय श्री मगनलाल जी चाँडक की पावन स्मृति में महेश भवन, डागा चौक, बीकानेर में एक गरिमामय एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। यह सभा किसी औपचारिक कार्यक्रम से अधिक संवेदना, स्मृति और कृतज्ञता का सामूहिक भाव थी, जहाँ समाजजनों ने नम आंखों से अपने प्रिय सेवाभावी व्यक्तित्व को नमन किया। सभा का शुभारंभ अत्यंत शालीन एवं भावनात्मक वातावरण में हुआ। अपने संबोधन में वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय श्री मगन लाल जी केवल एक नाम नहीं थे, बल्कि वे समाज के लिए जीवंत प्रेरणा थे। उनका संपूर्ण जीवन निःस्वार्थ सेवा, करुणा और सामाजिक उत्तरदायित्व की मिसाल रहा। उन्होंने अपने जीवनकाल में समाजसेवा को ही अपना धर्म माना। उनके द्वारा संचालित श्री कृष्ण अन्न क्षेत्र वर्षों से उनकी सेवा-भावना का सजीव प्रमाण रहा है, जिसके माध्यम से हर माह, हर पर्व और हर आवश्यकता के समय जरूरतमंद परिवारों तक भोजन सामग्री पहुँचाई जाती रही। इसके साथ-साथ बच्चों की शिक्षा, एकल महिलाओं के लिए पेंशन से जुड़े कार्यों तथा अन्य सामाजिक दायित्वों में भी उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा। सभा के दौरान दिवंगत आत्मा की चिरशांति हेतु सभी उपस्थितजनों द्वारा दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इसके पश्चात समाज के वरिष्ठजनों, परिजनों एवं शुभचिंतकों ने अपने-अपने संस्मरण साझा किए और स्वर्गीय श्री मगनलाल जी के सरल स्वभाव, सेवा-समर्पण और प्रेरक जीवन मूल्यों को स्मरण किया। वक्ताओं ने कहा कि भले ही आज वे हमारे बीच शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हैं, परंतु उनके विचार, संस्कार और सेवा-यात्रा आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बनी रहेगी। कार्यक्रम का संचालन प्रीति क्लब के सचिव रघुवीर झॅंवर ने अत्यंत संयमित, भावपूर्ण एवं गरिमामय ढंग से किया। अपने समापन शब्दों में उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। समाज ने एक स्वर में यह भाव प्रकट किया कि स्वर्गीय श्री मगनलाल जी चाँडक की सेवा-परंपरा और उनके आदर्श सदैव समाज को प्रेरणा देते रहेंगे। इन्हीं भावों के साथ श्रद्धांजलि सभा का शांतिपूर्ण एवं भावनात्मक समापन हुआ।

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