भारत में गौवंश की स्थिति बहुत ही दयनीय है, जहां धार्मिक आस्था के बावजूद उन्हें सड़कों पर आवारा घूमने, भूखों मरने व गंदगी में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। दूध न देने या अनुत्पादक होने पर उसे परित्यक्त कर दिया जाता है, जिससे वे प्लास्टिक खाने और कुपोषण के कारण असमय मृत्यु का शिकार हो जाती है। बेसहारा गौवंश सड़कों पर कूड़ा कचरा व बाजारो में लठ्ठ खाता हुआ दिखाई देना आम बात है। देखा जाए तो विश्व के सभी देशों में गाय दूध देती है लेकिन भारत में वोट देती है। सनातन धर्म की वाहक गौमाता की इस दयनीय स्थिति के मध्यनजर हिन्दुत्व व सनातन धर्म के बड़े बड़े आयोजन करना बेमानी ही होगा। इसी गौवंश को लेकर राजस्थान विधानसभा मे जोरदार हंगामा हुआ। यदि विधानसभा सभा अध्यक्ष विधानसभा को स्थगित न करते तो कुछ अप्रिय देखने को मिल सकता था। विधानसभा में सदस्यों के बीच हाथापाई की नौबत आ गई, जब कांग्रेस ने जयपुर की एक घटना का जिक्र किया तो भाजपा के एक विधायक इतने आक्रोशित हो गये और विपक्षी सदस्यों की तरफ बेल में बढ़ते देखे गये। तत्पश्चात् भाजपा के विधायक ने विधानसभा के बाहर अपने इस कृत्य पर खेद भी प्रकट किया लेकिन कांग्रेस उस विधायक के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव लाने की सोच रही है।
विधानसभा में भाजपा के बालमुकुंद आचार्य ने गौ हत्या को लेकर सवाल उठाया था व उन्होंने सरकार से गौ माता को राज्य माता दर्जा देने की मांग की लेकिन इसको लेकर पशुपालन मंत्री जोगाराम कुमावत ने अपने जबाब दिया वह अंचभित करने वाला था। मंत्री ने कहा कि प्रदेश में गौ हत्या को लेकर कानून बना हुआ है और गौ माता को राज्य माता का दर्जा देने का प्रस्ताव सरकार के समक्ष विचाराधीन नहीं है। विदित हो तत्कालीन गहलोत सरकार के शासन में आये दिन गौ माता को राज्य माता का दर्जा देने की मांग केवल वोट बैंक की खातिर करती रहती थी। आयुष अंतिमा (हिन्दी समाचार पत्र) ने राजस्थान खासकर गृह जिले में गौवंश की दयनीय हालातों को लेकर अपने लेखों द्वारा सरकार के संज्ञान में लाने का काम किया है, जिस पर विधानसभा में हुए हंगामे ने उस पर मुहर लगा दी है। गृह जिले झुनझूनू में गौशालाओ के संचालन के नाम पर डेयरी का संचालन हो रहा है लेकिन इसको लेकर राजस्थान सरकार ही संवेदनशील नहीं है तो स्थानीय प्रशासन पर दोषारोपण करना बेमानी होगा। कांग्रेस गौमाता को राज्य माता का दर्जा देने का समर्थन कर रही है लेकिन हिन्दुत्व रक्षक सरकार इसके लिए संवेदनशील नहीं है। जब भाजपा के शासन में यह दर्जा नहीं मिल रहा तो कांग्रेस शासन मे राज्य माता की मांग करना क्या दिखावा मात्र था। मंत्री जोगाराम कुमावत का बयान इस बात को प्रदर्शित करता है कि भाजपा का गौवंश के प्रति कितना सम्मान है। जब भाजपा शासित महाराष्ट्र सरकार ने गौ माता को राज्य माता का दर्जा दे दिया तो राजस्थान में क्या आफत आ रही है, यह समझ से परे है। निश्चित रूप से भाजपा ने गाय को एक राजनीतिक हथियार बनाकर वोट बटोरने का काम किया है। राजस्थान सरकार ने गौवंश को लेकर अपना नजरिया रख दिया है, अब सनातनियो को सोचना होगा कि गौवंश की रक्षा कैसे हो सकती है।