जयपुर: सांगानेर विधानसभा चुनाव के दौरान यह बहस जोरों पर थी कि श्रीमान भजन लाल शर्मा जी भरतपुर से आए हैं और उन्हें सांगानेर की गलियों और स्थानीय समस्याओं की समझ नहीं है। उस समय विकास के बड़े वादों के भरोसे सांगानेर की जनता ने उन्हें अपना प्रतिनिधि चुन लिया लेकिन आज, चुनाव के बाद जो हकीकत सामने आ रही है, वह सांगानेर वासियों के लिए किसी धोखे से कम नहीं है।
*"जय-जयकार" में खोई जमीनी हकीकत*
सांगानेर की जनता का मानना है कि भजन लाल शर्मा जी के मन में शायद क्षेत्र का विकास करने की इच्छा हो, लेकिन उनके आस-पास के 'खास लोग' ही सबसे बड़ी बाधा बन गए हैं। ये लोग केवल मुख्यमंत्री जी की जय-जयकार करने में लगे रहते हैं और उन्हें सांगानेर की वास्तविक समस्याओं और यहाँ की तकलीफों से रूबरू ही नहीं होने देना चाहते। इस चापलूसी के माहौल में जनता की आवाज दबी रह जाती है।
*अनुभवहीनता का खामियाजा*
सांगानेरवासियों को इस बात की भी गहरी तकलीफ है कि पहली बार विधायक बनने के बाद सीधे मुख्यमंत्री बने भजन लाल जी में प्रशासनिक अनुभव की कमी साफ झलक रही है।
*प्राथमिकता का अभाव* उन्हें यह समझ ही नहीं आ रहा कि कहां काम पहले होना चाहिए और कहां ज्यादा जरूरत है।
*सांगानेर की गलियों का दर्द*
सड़कों की दुर्दशा, सीवरेज की समस्या और पानी की किल्लत जैसी बुनियादी परेशानियां जस की तस बनी हुई हैं क्योंकि उन्हें जमीनी हकीकत का अंदाजा नहीं है।
*क्या यह सांगानेर के साथ धोखा है*
जब प्रतिनिधि को स्थानीय समस्याओं की गहरी समझ ही न हो और चापलूसों से घिरा हो, तो वह समाधान कैसे खोजेगा।
आज जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है और सवाल कर रही है कि क्या सांगानेर की आवाज़ सरकार तक सही ढंग से पहुँच भी रही है