राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने अपने 35 सीनियर आईएएस को जन सुनवाई के लिए मैदान में उतारा है। यह अफसर 181 नंबर काल सैंटर पर तैनात रहेंगे। इन अधिकारियों को यह निर्देश दिए गये है कि जनता की शिकायतों को सुनना ही नहीं है बल्कि इसके समाधान को लेकर संबंधित अधिकारी को तुरंत निर्देश भी देना है। इसके साथ ही यह अधिकारी लंबित पुरानी शिकायतों का भी निस्तारण करेगे। विदित हो मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने खुद 181 नंबर काल सैंटर का औचक निरीक्षण किया था व शिकायतकर्ता से बात कर समाधान का भरोसा दिलाया था। भजन लाल शर्मा का मानना है कि जब बड़े अधिकारी सीधे जनता से संवाद करेंगे तो अधीनस्थ प्रशासन के काम में पारदर्शिता आयेगी। इसका सीधा प्रभाव यह होगा कि जिला कलक्टर, एसडीएम व तहसीलदार को पता रहेगा कि उन पर सीनियर अधिकारी नजर लगाए बैठे हैं। इसके साथ ही आमजन के मन में सरकार के प्रति विश्वास पैदा होगा कि उनकी आवाज सीधे सरकार तक पहुंच रही है। यदि देखा जाए तो मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा का इस फैसले के लागू करने के पीछे उनकी अवधारणा है कि जनता प्रथम की नीतीश निती को लागू करना है। अब इस फैसले को लेकर पोस्टमार्टम करें तो सरकार की नितियो को सुचारु रूप से लागू करने में अफसरशाही का विशेष योगदान रहता है। यदि किसी विकास कार्य की फाइल मे विकास भोलाराम के जीव की तरह फाईल में ही पड़ा रहे तो उस सरकार की कार्यकुशलता व कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह उठने लाजिमी हो जाते हैं क्योंकि सरकारी फाईलें मंथर गति से चलती है, जब तक उनमें वजन न हो। राजस्थान मे अफसरशाही सरकार पर हावी होने के आरोप विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के विधायक भी लगाते रहे हैं कि अफसर उनकी नहीं सुनते। यहां तक कि राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी अफसरशाही के हावी होने को लेकर सरकार पर तंज कस चुकी है। अब सवाल उठता है कि जब अफसर विधायकों की नहीं सुनते तो आमजन की समस्या सुनकर उसका समाधान करना केवल मुंगेरी लाल के सपने देखने जैसा ही होगा। अफसरशाही की दबंगई का आलम तत्कालीन मुख्य सचिव सुधांश पंत के कार्यकाल में देख चुके हैं कि विधायकों की लंबी कतारें उनके आफिस के आगे लगी रहती थी। जनता को खुश करने वाली व लोकलुभावन घोषणाएं करना किसी भी सरकार का परम कर्तव्य होता है लेकिन धरातल पर उसके परिणाम शून्य ही नजर आते हैं। जिला स्तर पर जन सुनवाई को लेकर खानापूर्ति सर्व विदित है।
हालांकि मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की जनता के प्रति संवेदनशीलता की सोच का स्वागत होना चाहिए लेकिन इसके धरातल पर परिणाम मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा की सोच के अनुसार देखने को मिले तभी यह फैसला सार्थक होगा।