बीकानेर (प्रमोद आचार्य): 'भाव चढ़या आकाशों में सोने-चांदी रा, सावे में निकलग्या, गैणा पड़दादी रा, दिन-दिन बढ़ रही मंहगाई री मार है, जतना पर जीएसटी रो पड़ रहयो भार है, नशे सूं उजडयोडा, लाखो परिवार है...नेताओं री मिली भगत, करे बंटाधार है...' सरीखे व्यंग्य बाण कीकाणी व्यासों के चौक जब चले तो लोगों ने भी खूब दाद दी। अवसर था लटियाल नाट्य एवं कला संस्थान के तत्वावधान में मंचित हुई उस्ताद जमुना दास कल्ला की स्वांग मेहरी रम्मत का। ख्याल-चौमासा पर आधारित रम्मत को देखने के लिए आज सुबह तक होली रसिकों का चौक में जमावड़ा रहा। कलाकारों ने इस बार बढ़ती महंगाई, भ्रष्टाचार, नशाखोरी, जीएसटी, यूजीसी सहित कई मुद्दों को व्यंग्य शैली के तीर हंसी-हंसी में जमकर बरसाएं। यही वजह है कि आज भी किसी बात को शासन तक पहुंचाने में आज भी यह लोक नाट्य विधा रम्मतें अपनी भागीदारी निभा रही है। इस तरह के ख्याल बनाना और फिर उसको गायन की शैली में मंच पर साकार करना बड़ी चुनौती का काम है।
*एक बार रियासतकाल में शासन हो गया था नाराज..*
जमुनादास कल्ला की रम्मत से जुड़े एडवोकेट मदन गोपाल व्यास बताते हैं कि रियासतकाल में जब शार्दुल सिंह बीकानेर रियासत के राजा थे, उस समय एक बार गीतकार बछराज व्यास ने जमाखोरों पर एक ख्याल तैयार किया था, (एक छंद जमाने का जोड़ा, भगवान पधारो भारत में तुम बिन पड़े फोड़ा, सुख सूं मिल नहीं धोती जोड़ा...) उसमें हालात पर कटाक्ष था, लेकिन इसकी भनक रियासत तक पहुंच गई और राजा के आदेश पर शासन की पुलिस रम्मत के उस्ताद तक आ गई। ऐसा बताया जाता है कि बच्छराज व्यास को भूमिगत होना पड़ा, फिर गणमान्य लोगों ने महाराजा के समक्ष यह संदेश पहुंचाया कि यह ख्याल व्यंग्य है, लेकिन यह शासन की बजाय जमाखोरी करने वालों के खिलाफ है। ऐसे करके समझाईश हुई, तो रम्मत का मंचन हो सका।
*रम्मत के चौमासे भी रसिले हैं...*
जमुनादास कल्ला की स्वांग-मेहरी रम्मत के ख्याल की तरह ही चौमासे भी प्रसिद्ध है। चौमासा गीतों में नायिका की मन की व्यथा को उजागर किया गया है। नायिका का प्रीतम दूर देशों में कमाई के लिए गया हुआ है, इधर 'कुण समझावे ना रहयो जावे, म्हारा प्रीतम नहीं पास रे, है चौमासा गुलजार...आषढ़ मास में गिगन मंडल अमृत बरसावे है, थोरे बिन अब छैल भंवर जी म्हेसू रहयो ना जावे...' सरीखे चौमासा गीतों से वो प्रीतम को बुला रही है।
*लटियाल माता का हुआ अवतरण..*
रम्मत के अखाड़े में देर रात को लटियाल माता का अवतरण हुआ। मां के दर्शन करने के लिए सैकड़ों लोग उमड़ पड़े। मां की स्तृति हुई, तो माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। इसके बाद गीत-संगीत का रंगारंग कार्यक्रम हुआ। देर रात को ख्याल-चौमासा गीत लेकर स्वाग मेहरी मंच पर आए। सह गायकों ने भी टेर से टेर मिलाया। आज सुबह रम्मत के मंच पर राधा-कृष्ण की फूलों की होली हुई। इसमें राधा-कृष्ण बने कलाकारों ने गीतों धुनों पर नृत्य से समां बांध दिया।
*इनकी रही भागीदारी..*
रम्मत के ख्याल गीतों को झम्मू मस्तान और दिनेश ओझा ने तैयार किया है। वहीं रम्मत के निर्देशक एडवोकेट मदन गोपाल व्यास है। व्यवस्थाओं को लेकर श्यामसुंदर ओझा, मुकेश कल्ला ने भागीदारी निभाई। वहीं रम्मत मं मदन गोपाल व्यास, रामकिशन व्यास, शत्रुघ्न ओझा, मुकेश कल्ला, सूर्यप्रकाश, पूनमचंद, सुनील ओझा, सत्यनारायण ओझा, प्रेमनारायण चूरा, शंकर ओझा, रवि ओझा, जुगल ओझा, मनोज, मनमोहन ओझा, मयूर, गोवर्धन सहित कलाकारों ने भूमिका अदा की। वहीं नगाड़ा पर बंटी और शरद ने संगत की। मां लटियाल का स्वरूप गोपाल ओझा ने धरा।