टका वसूली के लिए व्यासों की निकली गैर

AYUSH ANTIMA
By -
0


बीकानेर (प्रमोद आचार्य): बीकानेर की होली की तमाम परंपराएं रियासत कालीन है। इन परंपराओं का आज भी बखूबी निर्वहन किया जा रहा है। एकादशी के मौके पर लालाणी-कीकाणी व्यास जाति की तरफ से पारंपरिक गेर निकाली गई। यह गैर विभिन्न मोहल्ले से होती हुई तेलीवाड़ा पहुंची, जहां तमाम सर्राफा व्यवसायियों ने व्यासों की परंपरा में अपना योगदान दिया। यह गैर टका वसूली यानी चंदे के लिए ही तेलीवाड़ा जाती है। 
समाजसेवी गणेश लाल व्यास ने बताया कि पूर्व में यहां पर भक्त जाति के लोग रहते थे। इस जाति के परिवारों से चंदा वसूल किया जाता था। फिर इसी चंदे से व्यास जाति के लोग अपनी होली के कुछ इवेंट आयोजित करते थे। हालांकि अब भक्त जाति के तेलीवाड़ा एरिया के बेहद कम परिवार रहते हैं। इसलिए अब इस परंपरा में तेलीवाड़ा के सर्राफा व्यापारी अपना सहयोग देने लगे हैं। पिछले कई सालों से तेलीवाड़े के सर्राफा व्यापारी नगद राशि के साथ-साथ एक चांदी का सिक्का भी व्यास जाति को टके के रूप में प्रदान करते हैं। इस तरह बरसों पुरानी परंपरा का आज भी निर्वहन किया गया।

*गेवरियो रे काढ़ो लस लस टीको..*

शुक्रवार दोपहर सबसे पहले लालाणी व्यास परिवारों के लोग चंग की थाप पर ईये गेवरियो रे काढ़ो लस लस टीको के उदघोष के साथ निकले। वे कीकाणी व्यासों के चौक में गए तो वहां पहले से मौजूद कीकाणी परिवार गैवर में शामिल हो गए। फिर दोनो जातियों के लोगो ने जमकर होलिया गाई। इन्होंने लाल केशा ओ लाल केशा भी गया। ये गैर बिनानी चौक, रघुनाथ मन्दिर के आगे से होती हुई तेलीवाड़ा पहुची, जहां व्यासों की तरफ से गणेश लाल व्यास ने टका वसूली की। व्यापारियों ने नकदी के साथ साथ चांदी का सिक्का भी इन गेवरियो को प्रदान किया। इस दौरान होली की मीठी गालियों का भी गायन हुआ।

*ये रहे मौजूद*

लालाणी-कीकाणी व्यास जाति से नारायण व्यास, मक्खन लाल व्यास, सुरेंद्र व्यास, श्रीकांत व्यास, कानू लाल व्यास, उमेश कुमार व्यास, विष्णुकांत व्यास, शिवकुमार व्यास बृजेश्वर व्यास, गणेश लाल व्यास, बलभेष व्यास आजाद, मांगीलाल व्यास, काला महाराज, सीताराम, कपिल व्यास वह बद्री दास व्यास सन्नू सहित अनेक मौजीज लोग मौजूद रहे।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!