खेजड़ली मरूस्थल का कल्पवृक्ष*

AYUSH ANTIMA
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कदै डाल पै कोयल कूकै, कदै कागला कांव ऊंट पातड़ा खा अरड़ावै, धन धन तेरी छांव 
स्याल़ो और उनालौ झेले, आंधी और डूगटू सूं खेल।।
उपरोक्त लाईनों से यह प्रतीत होता है कि राजस्थान का राज्य वृक्ष मरूस्थल का कल्पवृक्ष और जीवन रेखा है। यह सूखे में हरा रहकर छाया, पौष्टिक चारा (लूंग) और स्वादिष्ट फली (सांगरी) प्रदान करता है। किसान इसे रेगिस्तान का गौरव और मित्र मानते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में सहायक है। खेजड़ी की जड़ें मिट्टी को बांधकर रखती है । यह वृक्ष नाईट्रोजन के स्थिरीकरण में मदद करता है व रेगिस्तानी हवाओं से फसल की रक्षा करता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसे पवित्र भी माना गया है। राजस्थान में विशेषकर दशहरे पर खेजड़ी की पूजा होती है। यह धार्मिक मान्यता है कि इसमें भगवान शंकर वास करते हैं।‌ राजस्थान के विश्नोई समाज के लिए खेजड़ी केवल वृक्ष ही नहीं अपितु उनके धर्म, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का सर्वोच्च प्रतीक है। इतिहास गवाह है कि सन् 1730 में जोधपुर के खेजरली गांव के राजा के सैनिकों द्वारा काटे गये खेजडी को लेकर अमृता देवी विश्नोई के साथ 363 विश्नोईयो ने "सिर साटे रूंख रहे तो भी सस्तों जाण" यानी सिर कटाकर भी खेजड़ी बचती है, यह सस्ता है का संदेश देते हुए अपने प्राण त्याग दिये थे। विदित हो पुगल क्षेत्र में एशिया का सबसे बड़ा सोलर हब विकसित किया जा रहा है। यहां हजारों बीघा जमीन पर सोलर कंपनियों द्वारा प्लांट लगाए जाने हैं। इस परियोजना को लेकर हजारो खेजड़ी के पेड़ काटे जाने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। इसको लेकर बीकानेर में सैकड़ों साधु संतों व पर्यावरण प्रेमियों का आमरण अनशन जारी है। आरोप है कि बीकानेर और जोधपुर आदि जिलों मे जो सोलर पार्क के लिए हजारों बीघा जमीन दी है, वहां पचास पचास वर्ष पुराने खेजड़ी के पेड़ काटे जा रहे है। इसको लेकर साधु संत भी इस आंदोलन में कूद पड़े हैं व आमरण अनशन में महिला व पुरुषों के साथ बैठ गये है। खेजड़ी को बचाने को लेकर अमृता देवी विश्नोई के साथ 363 लोग पहले ही बलिदान दे चुके हैं। क्या भजन लाल शर्मा सरकार उसी इतिहास को दोहराने का इंतजार कर रही है। इस आंदोलन में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपना खुला समर्थन दिया है। वसुंधरा राजे ने अपने पोस्ट में लिखा है कि खेजड़ी केवल पेड़ नहीं बल्कि आस्था व संस्कृति से जुड़ा देव वृक्ष है। खेजड़ी राजस्थान की पहचान है, इसकी रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। राजनीति से उपर उठकर हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। वसुंधरा राजे ने संकल्प व्यक्त किया कि खेजड़ी और ओरण (गौचर भूमि) को बचाने की मुहीम में सबके साथ खड़ी हूं। एक तरफ एक पेड़ मां के नाम मुहीम चलाकर भजन लाल शर्मा सरकार पर्यावरण को बचाने का संदेश दे रही है तो दूसरी तरफ हजारों पेड़ काटते हुए देख रही है। उर्जा के क्षेत्र में सरकार का आत्मनिर्भर बनने के संकल्प उचित है लेकिन खेजड़ी की बलि देकर यह नही होना चाहिए। सरकार को इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने के साथ ही आंदोलनकारियों से सकारात्मक बातचीत कर खेजड़ी को बचाने के लिए सार्थक पहल करे।

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