देशज ज्ञान परंपरा से ही निकलेगी कैंसर निदान की राह : प्रो. एम.एम. सक्सेना

AYUSH ANTIMA
By -
0


बीकानेर। अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के समापन अवसर पर अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए प्रो. एम. एम. सक्सेना, कुलपति टांटिया विश्वविद्यालय ने कहा कि कैंसर निदान व बचाव की प्रभावी दिशा देशज ज्ञान परंपरा और क्षेत्रीय आहार आधारित जीवनशैली से ही निकलेगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति में हो रही विकृतियां संस्कृति और स्वास्थ्य दोनों के लिए घातक हैं। सेमिनार के दूसरे दिन कुल 97 ओरल प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किए गए। आयोजन को सफल बनाने में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. राजेंद्र पुरोहित की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने कहा कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से मुकाबले के लिए प्राचीन पद्धतियों के पुनरीक्षण के साथ वैज्ञानिक नवाचार आवश्यक है और इस दिशा में महाविद्यालय निरंतर सक्रिय है। संयोजक डॉ. अर्चना पुरोहित ने बताया कि दो दिवसीय सेमिनार में 19 आमंत्रित व्याख्यान, 30 पोस्टर प्रेजेंटेशन तथा 60 से अधिक शोधपत्रों का वाचन हुआ। सोमवार सायं राम रंगमंच पर आयोजित सांस्कृतिक संध्या में राजस्थानी लोक संगीत व नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों को अतिथियों ने सराहा। इस वर्ष का प्रतिष्ठित एम.आर. राजू पुरस्कार कनिष्क व्यास को प्रदान किया गया, वहीं 10 युवा वैज्ञानिक पुरस्कार एवं 10 सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार भी दिए गए। समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. अरुण चोगले ने ऐसे आयोजनों को समय की आवश्यकता बताया तथा विशिष्ट अतिथि प्रो. जयसिंहम ने जागरूकता को रोग निवारण का पहला चरण बताया। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन प्रो. प्रताप सिंह ने किया।

Post a Comment

0Comments

Post a Comment (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!