स्त्री की चुप्पी को अक्सर उसकी कमजोरी समझ लिया जाता है पर सच यह है कि स्त्री चुप इसलिए रहती है क्योंकि वह रिश्तों की इज़्ज़त करना जानती है। वह जानती है कि हर सच को आवाज़ देना हर बार ज़रूरी नहीं होता। वह सहती है, झुकती नहीं, वह रोती है, टूटती नहीं। वह अपने दर्द को भी मुस्कान में ढाल लेती है ताकि अपनों की दुनिया सुरक्षित रहे।उसकी कोमलता उसका सौंदर्य है और उसका संयम उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। वह मौन में भी बहुत कुछ कह जाती है, बस सुनने वाला संवेदनशील होना चाहिए। याद रखिए-जो स्त्री सहना जानती है, वही समय आने पर सच के साथ खड़ी होना भी जानती है। उसका मौन उसकी हार नहीं बल्कि उसके धैर्य की पहचान होती है।
स्त्री कोमल है पर कमजोर नहीं, वह शक्ति है।
*26 जनवरी — नारी सम्मान ही राष्ट्र का सच्चा सम्मान है।*